शादी से पहले लिव इन और बच्चे भी..परिवार को भी मंजूर, सुनिए राजस्थान की गरासिया समुदाय की ये अनोखी परंपरा

शादी से पहले लिव इन और बच्चे भी..परिवार को भी मंजूर, सुनिए राजस्थान की गरासिया समुदाय की ये अनोखी परंपरा
राजस्थान
16 Mar 2026, 06:47 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Garasia Live In Tradition: जहां देश में लिव-इन को मॉडर्न लाइफस्टाइल माना जाता है। वहीं राजस्थान–गुजरात की एक जनजाति है- गरासिया। इनके लिए ये सब सदियों से नॉर्मल है। जी हां, हजारों साल पुरानी “मॉडर्न लाइफ”। हमें पता है आपको इस बात पर यकीन नहीं होगा। लेकिन ये सच है। राजस्थान–गुजरात (Rajasthan Garasia Tribe Live in Tradition) की बॉर्डर बेल्ट पर रहती है गरासिया ट्राइब। खेती-मज़दूरी करने वाला ये समुदाय आज भी अपनी पुरानी परंपराओं पर टिका हुआ है। लेकिन मज़े की बात ये है कि उनकी परंपराएं आज के मॉडर्न युवाओं से ज्यादा अपग्रेडेड लगेंगी। यहां शादी से पहले साथ रहना बिलकुल नॉर्मल है। लड़का-लड़की साथ रहते हैं, बच्चे होते हैं और शादी। यानी पहले रिलेशन, बाद में शादी और तो और लिव इन में ही ये बच्चे पैदा करते हैं और परिवार इसे स्वीकार भी कर लेता है। इस पूरी व्यवस्था को कहा जाता है- दापा प्रथा।

क्या होता है दापा प्रथा में

इस दापा प्रथा में लड़के के परिवार को लड़की के परिवार को एक तय रकम देनी पड़ती है और उसके बाद कपल आराम से साथ रहने लगता है। अब ये होता कैसे है, तो ये भी सुनिए- दरअसल इसकी शुरूआत होती है एक मेले से, ये मेला हर दो साल में लगता है। इसका नाम है गौर मेला, यहां गरासिया समुदाय के लड़के-लड़कियां आते हैं। यहां वे अपनी मर्जी से अपना जीवनसाथी पसंद करते हैं और फिर यहां से वो घर नहीं बल्कि वहां जाते हैं। जहां वो अकेले रह सकें। जी हां, और परिवार को इससे कोई आपत्ति भी नहीं होती। यानी ना कोई पंडित, न कोई बैंड-बाजा, ना कोई कार्ड छपवाना। इसके बगैर ही कपल साथ रहने लगता है। अगर लड़की चाहे तो अगले मेले में अपना पार्टनर भी बदल सकती है। मतलब रिश्तों का कंट्रोल पूरी तरह लड़की के हाथ में। इससे आप ये समझ सकते हैं कि आज भी इस मॉडर्न जमाने में जब लड़कियां इतनी आगे बढ़ चुकी हैं। लेकिन जीवनसाथी के मामले में वे अभी भी स्वतंत्र नहीं हैं। उस जमाने में गरासिया समुदाय की ये परंपरा नए जमाने की लड़कियों को मुंह चिढ़ाने का काम कर रही हैं।

भारत में जहां शादी को लेकर लड़कियों पर कई पाबंदियां होती हैं। वहीं गरासिया समुदाय में महिलाओं का दर्जा सीधे टॉप पर है। शादी का पूरा खर्च लड़के को उठाना होता है। यहां की जिंदगी सीधे-सादे नियमों पर चलती है। पहले साथ रहो, देखो कि लाइफ कैसी चल रही है। फिर शादी करना हो तो करो, नहीं तो कोई दबाव नहीं।

ज़्यादातर लोग तब शादी करते हैं जब पैसे इकट्ठे हो जाएं। तब तक कपल रिलेशन में रहते हैं और कई बार बच्चे भी हो जाते हैं। कई रिसर्चर्स का कहना है कि इस सिस्टम में दो चीजें बहुत स्ट्रॉन्ग हैं- खुद ही पार्टनर को चुनना और पसंद नहीं आए तो रिजेक्ट कर दो। इसी वजह से यहां दहेज, घरेलू हिंसा और महिलाओँ पर होने वाले क्राइम्स बहुत कम हैं। एक तरह से ये जनजाति वही कर रही है जो बाकी समाज अभी सीखने की कोशिश कर रहा है। यानी शहरों में लिव-इन को लेकर जितनी बहस होती है, उससे कहीं ज्यादा प्रैक्टिकल और क्लियर है गरासिया समुदाय की सोच। ये कहानी बताती है कि प्रोग्रेसिव सोच सिर्फ शहरों में नहीं मिलती। कई बार जंगलों और पहाड़ियों में भी सदियों से मौजूद होती है।


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