दिल्ली शराब घोटाला केस में कोर्ट ने क्यों अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया - 6 बातों में समझिए पूरी कहानी

दिल्ली शराब घोटाला केस में कोर्ट ने क्यों अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया - 6 बातों में समझिए पूरी कहानी
दिल्ली
27 Feb 2026, 06:55 pm
रिपोर्टर : Dushyant

Delhi Liquor Scam Case: How Kejriwal is freed: अगस्त 2022 में शुरू हुए दिल्ली के शराब घोटाला केस में कोर्ट ने अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत चार्जशीट में नामजद 23 आरोपियों को सभी आरोपों से मुक्त कर बरी कर दिया है। शराब घोटाला केस का फैसला सुनाते वक़्त जज जितेन्द्र सिंह ने कहा कि सीबीआई ने जो सबूत पेश किये हैं, वो सिर्फ बयानों पर आधारित है, इसलिए वे कोर्ट में मान्य नहीं है। कोर्ट ने काफी इंतज़ार किया, लेकिन सीबीआई के पास कोई ठोस सबूत नहीं है, और ना ही ऐसा कोई ठोस साक्ष्य कोर्ट में प्रस्तुत किया गया है।

दरअसल, दिल्ली शराब घोटाला केस अगस्त 2022 में शुरू हुआ था। केस में सीबीआई ने अब तक कुल 5 चार्जशीट पेश की है। पहली चार्जशीट नवम्बर 2022 में दाखिल हुई, जिसमें पहले 17 व्यक्तियों को आरोपी तय किया गया था। बाद में इसमें और नाम जोड़कर 23 आरोपी कर दिए गए। इसके बाद कुल 4 सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल हुई -- अप्रैल 2023, जुलाई 2023 और 2024 में 2 CS.

केस में अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक जैसे कई बड़े पॉलिटिशियन्स का भी नाम आया, जिन्हें बाद में आरोपी बनाया गया। मामले की जाँच ED और CIA कर रही थी। केस में 300 से ज्यादा गवाह कोर्ट में पेश किये गए, लेकिन कोर्ट ने उन्हें नाकाफ़ी मानते हुए आरोपियों को बरी कर दिया। लेकिन आखिर ऐसा क्यों हुआ कि सीबीआई के लगाए गए आरोप गुब्बारे की तरह फूट गए? जानिए सीबीआई के लगाए गए 6 बड़े आरोप :-

 

सीबीआई के आरोपों पर कोर्ट का क्या फैसला रहा.

आरोप 1. नई शराब नीति बनाने के दौरान होलसेल ट्रेडर्स को फायदा पहुँचाने के लिए प्रॉफिट को 5% से बढ़ाकर 12% कर दिया। आरोप लगा कि शराब नीति बनाते वक़्त यह पहले ही तय किया गया कि 12% में से 6% कमीशन रूलिंग पार्टी के खाते में आएगा।

कोर्ट का फैसला – कोर्ट ने कहा कि यह आरोप सिर्फ बयानों के आधार पर लगाया गया है। सीबीआई ने आरोप को लेकर कोई भी ठोस प्रमाण कोर्ट में पेश नहीं किया है। इसलिए इस आरोप को ख़ारिज कर दिया गया।

आरोप 2. चार्जशीट में आरोप लगाया गया कि शराब नीति और घोटाले को लेकर मई 2021 में दिल्ली में विजय नायर के कहने पर एक मीटिंग हुई थी। मीटिंग में अरुण पिल्लई, अभिषेक बोनापल्ली और दिनेश अरोड़ा थे। सीबीआई ने दिनेश अरोड़ा के बयान पर यह आरोप लगाया।

कोर्ट का फैसला – कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति खुद आरोपी है, उसे गवाह बनाकर केस नहीं किया जा सकता। साथ ही, इसको लेकर भी सीबीआई ने अलग से कोई सबूत पेश नहीं किया है।

आरोप 3. सीबीआई ने चार्जशीट में 300 गवाहों के बयान लिए और दिनेश अरोड़ा और शरतचंद्र रेड्डी जैसे आरोपियों को सरकारी गवाह बनाया। सीबीआई ने कहा कि दोनों व्यक्ति पूरी प्रक्रिया का हिस्सा थे।

कोर्ट का फैसला – कोर्ट ने किसी भी गवाह के बयान को सही नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई इस केस में आपराधिक साज़िश को साबित करने में विफल रहा है।

आरोप 4. सीबीआई की पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कहा गया कि तत्कालीन डिप्टी CM मनीष सिसोदिया ने अपनी पोजीशन का गलत इस्तेमाल करते हुए कुछ ख़ास कंपनियों को फ़ायदा दिलाने के लिए नीतियों में मनमाना बदलाव किया। इसके लिए मनीष ने रिश्वत भी ली।

कोर्ट – सीबीआई ने ऐसा कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया, जो रिश्वत लेने की बात को साबित करे। सिर्फ बयानों के आधार पर आरोप को सही नहीं कहा जा सकता। जो नीतियां बनाई गई, वे भी पूरी पारदर्शिता के साथ थी।

आरोप 5. सीबीआई का आरोप था कि अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेताओं ने हवाला के ज़रिये साउथ ग्रुप से 100 करोड़ की रिश्वत ली।

कोर्ट – पैसा कैसे लिया गया, इसे साबित करने में सीबीआई नाकाम रही है। आरोप सिर्फ अनुमान के आधार पर लगाया जाना प्रतीत होता है, जो सही नहीं है।

आरोप 6. चार्जशीट में साउथ ग्रुप और सम्बंधित कंपनियों को आरोपी बताया गया। आरोप था कि घोटाले में कंपनी ने पैसे दिए थे।

कोर्ट- कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा कि अखंड भारत में इस तरह के शब्द इस्तेमाल करना गलत है। आपने सीधे-सीधे कंपनियों के नाम नहीं लिखे।

 

CBI ने केस में 1000 पेज की चार्जशीट और 300 से ज्यादा गवाह पेश किये, लेकिन कोर्ट ने सीबीआई द्वारा पेश किये गए सबूतों और गवाहों को अपर्याप्त मानते हुए आरोपियों पर लगाए गए सभी आरोपों को ख़ारिज कर दिया और उन्हें बरी कर दिया।


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