TUE, 10 FEBRUARY 2026

बाड़मेर-बालोतरा की सियासत में गहलोत की एंट्री! सरकार के फैसले को बताया तुगलकी फरमान

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राजस्थान
04 Jan 2026, 04:01 pm
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रिपोर्टर : Jyoti Sharma

राजस्थान की सियासत में इन दिनों बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में हुए बदलाव ने हलचल मचा दी है। 31 दिसंबर की आधी रात को राज्य सरकार ने अचानक अधिसूचना जारी कर इन दोनों जिलों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण कर दिया। अब बायतु विधानसभा क्षेत्र को बालोतरा से हटाकर बाड़मेर जिले में शामिल कर दिया गया है, जबकि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बालोतरा जिले का हिस्सा बना दिया गया है। इस फैसले ने जहां भाजपा समर्थकों में और बेनीवाल खेमे में खुशी की लहर दौड़ा दी है क्योंकि बेनीवाल ने हाल ही एक बयान में हरीश चौधरी के गढ़ कहे जाने वाले बायतु में गठबंधन कर या उसके बगैर चुनाव लड़ने की बात कही थी। वहीं कांग्रेस की तरफ से अशोक गहलोत के एक बयान में ने इसे जनविरोधी और सियासी फायदे के लिए लिया गया तुगलकी फरमान करार दिया है।






सरकार का फैसला जनविरोधी और अतार्किक


गहलोत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि 31 दिसंबर की आधी रात को बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में जल्दबाजी से किया गया फेरबदल राज्य सरकार का एक और तुगलकी फरमान है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बायतु को बाड़मेर में और गुड़ामालानी-धोरीमन्ना को बालोतरा में शामिल करने का फैसला प्रशासनिक दृष्टि से पूरी तरह अतार्किक और जनविरोधी है।


गहलोत ने याद दिलाया कि उनकी सरकार ने प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने की मंशा से नए जिलों का गठन किया था, ताकि लोगों को दूर-दूर तक नहीं भटकना पड़े लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार जनभावनाओं की अनदेखी कर केवल सियासी फायदे साधने और सियासी रोटियां सेकने में लगी हुई है। गहलोत ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि यह जनता के खिलाफ है। जानकारों का मानना है कि सरकार ने आखिरी मौके पर यह बदलाव कर इसे स्थायी बनाने की कोशिश की है, ताकि आगे इसे आसानी से पलटा न जा सके। इस अधिसूचना के बाद बाड़मेर और बालोतरा में सियासी माहौल गरमा गया है।


हरीश चौधरी को मिला गहलोत का साथ?


दूसरी तरफ अशोक गहलोत के इस बयान से अब सियासी गलियारों में ये चर्चा तेज हो गई है कि क्या गहलोत हरीश चौधरी का पक्ष ले रहे हैं, क्या वो हरीश चौधरी के लिए सहानुभूति दिखा रहे हैं और हरीश चौधरी गहलोत के इस बयान को कैसे लेते हैं, क्योंकि गहलोत और हरीश चौधरी के बीच तनातनी कई बार देखने को मिली है, चाहे वो 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान हो या फिर इससे पहले बाडमेर और बालोतरा को अलग करने को लेकर। यहां इस बात पर गौर करना चाहिए कि हरीश चौधरी पायलट गुट के नेता माने जाते हैं जबकी गहलोत से उनकी नजदीकी सीमित है, तो गहलोत का ये रुख कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में क्या गुल खिलाएगा ये तो अब आने वाला वक्त ही बताएगा।


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