बांग्लादेश में सत्ता पलट! BNP की सुनामी जीत, क्या भारत के लिए मुश्किल बनेंगे तारिक रहमान?

बांग्लादेश में सत्ता पलट! BNP की सुनामी जीत, क्या भारत के लिए मुश्किल बनेंगे तारिक रहमान?
अंतरराष्ट्रीय
13 Feb 2026, 01:58 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश से आई एक खबर ने दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। बांग्लादेश में अब सत्ता बदल चुकी है। वहां मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) का राज चला गया है। बांग्लादेश के चुनाव में वहां की जनता ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (Bangladesh Nationalist Party, BNP) को अपना बंपर वोट दिया है। रुझानों में ये पार्टी प्रचंड जीत की तरफ बढ़ती नजर आ रही है। इसने पूरे साउथ एशिया की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है और अब सेंटर ऑफ डिस्कशन बन गए हैं, 17 साल निर्वासन में रहने वाले नेता तारिक रहमान (Tarique Rahman)। ये अब बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं क्योंकि वे BNP के नेता हैं और चुनाव से पहले ही वे PM पद के दावेदार माने जा रहे थे।

बांग्लादेश में इस बार शेख हसीना की पार्टी पर बैन

बांग्लादेश की मीडिया ढाका ट्रिब्यून और स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक BNP 180 सीटें ला सकती है। यहां हम आपको बांग्लादेश का थोड़ा चुनावी गणित (Bangladesh Election 2026) भी बता देते हैं। दरअसल बांग्लादेश में कुल 350 सीटें हैं। 299 पर इस पर सीधा चुनाव हुआ है। बाकी की 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

इस बार के चुनाव पर शेख हसीना (Sheikh Hasina) की पार्टी आवामी लीग पर बैन लगा हुआ था। जिसके चलते पार्टी चुनाव से गायब रही। यहां ये भी बात गौर करने वाली है कि शेख हसीना की आवामी लीग कभी बांग्लादेश (Awami League) की सबसे ताकतवर पार्टी मानी जाती थी। कई जानकारों का तो ये भी कहना है कि आवामी लीग अगर इस चुनाव में पूरी तरह मैदान में उतरती, उस पर इतने प्रतिबंध ना लगाए जाते और उनके नेताओं पर तमाम मुकदमे दर्ज ना होते तो आज शायद शेख हसीना की पार्टी ही दुबारा सत्ता में होती। शायद उसकी ताकत की वजह से ही यूनुस सरकार ने पार्टी पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए।




कट्टर इस्लामी सियासी दलों में ही महामुकाबला

इस चुनाव में BNP का सीधा मुकाबला था बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी और युवाओं की पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी के 11 दलीय गठबंधन से। ये दोनों ही कट्टर इस्लामी और भारत विरोधी मानी जाती हैं। इस चुनाव में जमात-ए-इस्लामी ने पूरा दम लगाया लेकिन सत्ता की कुर्सी उससे दूर ही रही। यानी ढाका में अब सियासी तस्वीर साफ है कि वहां अब BNP का राज है।

कौन हैं नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Tarique Rahman)

तारिक बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया (Khalida Zia) के बेटे हैं। वे 60 साल के हैं और 17 साल ब्रिटेन में निर्वासित रहे हैं। लगभग एक महीने पहले ही उन्होंने बांग्लादेश में वापसी की। और अब वे सत्ता के शिखर पर पहुंच गए। बांग्लादेश की जनता से उन्होंने वादा किया है कि वो देश में कानून का राज स्थापित करेंगे, जो शेख हसीना के जाने के बाद से ही गायब है। जैसे गारमेंट सेक्टर में नई जान फूकेंगे जो कि बांग्लादेश की जीवनरेखा ही है। लेकिन सवाल अभी भी वही कि क्या ये सिर्फ चुनावी जुमले थे या असली बदलाव जल्द देखने को मिलेगा?

तारिक रहमान की एंटी इंडिया इमेज!

वहीं तारिक रहमान का PM बनना क्या भारत के लिए खतरे की घंटी है। क्योंकि तारिक की इमेज एंटी इंडिया है। BNP का इतिहास दिल्ली के साथ तनाव भरा रहा है। लेकिन वो कहते हैं ना कि राजनीति में हमेशा कोई दोस्त या दुश्मन नहीं होता। ऐसे में आज भारत के सामने समीकरण साफ है कि क्या वो BNP को “कम बुरा” विकल्प मानकर रिश्तों को रीसेट करेगा या फिर ढाका और दिल्ली के बीच नई खींचतान शुरू होने वाली है।

क्या लागू होगा जुलाई चार्टर?

अब बात यहां के चुनाव की करते है वो ये कि इस बार सिर्फ सांसद नहीं चुने गए। दरअसल चुनाव में एक और वोट पड़ा ‘जुलाई चार्टर’ पर। ये पहल बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार और अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) की प्रस्तावित थी। इसका प्रस्ताव है कि दो सदन वाली संसद हो। कोई भी व्यक्ति दो बार से ज्यादा प्रधानमंत्री नहीं रहे। चुनाव से 90 दिन पहले केयरटेकर सरकार हो। ऐसे में अगर ये लागू हुआ तो बांग्लादेश की राजनीति का ढांचा ही बदल सकता है। वहीं अब BNP जीत चुकी है, तारिक रहमान वापसी कर चुके हैं। लेकिन क्या वे भारत से रिश्तों में नरमी दिखाएंगे या राष्ट्रवाद की आग को और हवा देंगे? क्योंकि अब साउथ एशिया का अगला अध्याय शुरू हो चुका है।


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