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Bangladesh में एक और हिंदू को जिंदा जलाया! नरसिंगदी में चंचल भौमिक की क्रूर हत्या, परिवार बोला- पूर्व नियोजित साजिश

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अंतरराष्ट्रीय
25 Jan 2026, 01:38 pm
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रिपोर्टर : Dushyant

Bangladesh Hindu Chanchal Bhowmik murder: बांग्लादेश में हो रही हिन्दुओं की हत्या का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। दीपू चन्द्र दास की हत्या से शुरू हुए इस नरसंहार में इस बार नरसिंगडी जिले में एक 23 वर्षीय हिंदू युवक को जिंदा जला दिया गया है। शुक्रवार देर रात को कुछ कट्टरपंथियों ने हिन्दू युवक चंचल भौमिक को गैरेज में सोते हुए जिंदा जला दिया गया। परिवार ने इसे पूर्व नियोजित हत्या बताया और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।


जानकारी के मुताबिक, चंचल चंद्र कोमिला जिले के लक्ष्मीपुर गांव का निवासी था और काफी लम्बे समय से नरसिंगडी में एक गैरेज में काम करता था। स्थानीय व्यक्तियों के अनुसार, हमला 23 जनवरी की देर रात को उस वक़्त किया गया, जब चंचल गैरेज में सो रहा था। हमलावरों ने गैरेज के शटर पर बाहर से पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। आग की लपटें तेजी से अंदर फैल गयी, जिसमें चंचल फंस गया। उसका शरीर इतना झुलस गया कि पहचान मुश्किल हो गई। सीसीटीवी फुटेज में एक व्यक्ति को आग लगाते हुए देखा गया है।


आग लगने पर स्थानीय लोगों ने फायर ब्रिगेड को फ़ोन किया। फायर ब्रिगेड की टीम ने एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जब तक आग बुझाकर शटर खोला गया, तब तक चंचल जिन्दा जलकर मर चुका था।


परिवार के सदस्यों ने बताया कि चंचल का किसी से कोई विवाद नहीं था। उसके पिता खोखन चंद्र भौमिक ने कहा, "यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश है। हम न्याय की मांग करते हैं।" स्थानीय हिंदू नेताओं ने भी इस घटना की निंदा की और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठाए। पुलिस ने मौके से सबूत जुटाए हैं और जांच जारी है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। CCTV फुटेज की भी जाँच की जा रही है।


यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की चिंता बढ़ा रही है। पिछले कुछ महीनों में हिंदू समुदाय पर कई हमले हुए हैं, जिनमें दिसंबर में एक अन्य युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या और फिर जलाने की घटना शामिल है। भारत-विरोधी भावनाओं और कट्टरपंथी गतिविधियों के बीच ये घटनाएं बढ़ रही हैं। चुनाव नजदीक होने से तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।


इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा की है, और मानवाधिकार संगठन जांच की मांग कर रहे हैं।


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