पाकिस्तान को इतना सिर पर क्यों बिठा रहे ट्रंप, अब तो ईरान भी इस बेनाम रिश्ते से ठिठका!

पाकिस्तान को इतना सिर पर क्यों बिठा रहे ट्रंप, अब तो ईरान भी इस बेनाम रिश्ते से ठिठका!
अंतरराष्ट्रीय
22 Apr 2026, 12:32 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

US Iran Ceasefire Credit Pakistan: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को आगे बढ़ा दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका क्रेडिट भी पाकिस्तान को दे डाला है। इधर ईरान की सेना रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका धमकी भी दे दी है। ऐसे में यहां दो बड़े सवाल उठ रहे हैं कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान पर इतना मेहरबान क्यों हो रहे हैं और दूसरा ईरान जो पाकिस्तान का सबसे खास दोस्त माना जाता है, वो ट्रंप और पाकिस्तान के इस बेनाम रिश्ते पर क्या रुख रख रहा है?

दरसअल डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को ईरान के साथ सीज़फायर बढ़ाने का क्रेडिट दे दिया है। ट्रंप का मानना है कि पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच जो मध्यस्थता दिखा रहा है वो वाकई काम कर रहा है। पाकिस्तान में तो ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की शांतिवार्ता भी प्रस्तावित है। वहीं जब ट्रंप ने पाकिस्तान को ये श्रेय दिया तो तुरंत पाक प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की छाती चौड़ी हो गई। शरीफ ने तुरंत ट्रंप को इस बात का धन्यवाद भी दे दिया। उन्होंने कहा कि वे अपनी तरफ से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के ही कोशिशों का नतीजा है कि अमेरिका ने उनके शांति प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। उम्मीद करते हैं कि ये सीजफायर दोनों देशों के बीच शांति लेकर आएगा।

ईरान को पसंद नहीं आ रही पाकिस्तान-अमेरिका की ये दोस्ती?

एक तरफ तो डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर आगे बढ़ाने का ऐलान किया तो दूसरी तरफ ईरान आगबबूला हो गया। ईरानी सेना रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि जो ट्रंप बार-बार ईरान को धमका रहे हैं इसका नतीजा अच्छा नहीं होगा। साथ ही कहा कि इस्लामी ईरान के खिलाफ अब अगर कोई हमला हुआ, तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा, इसके अलावा उन्होंने कहा कि ईरान के बच्चों पर जो हमला हुआ उसका बदला तो इजरायल से लिया ही जाएगा।

ईरान के इस बयान से साफ है कि उसे पाकिस्तान की मध्यस्थता कुछ समझ तो आ रही है लेकिन उसे अमेरिका के साथ पाकिस्तान की ये करीबी गवारा नहीं है। क्योंकि पाकिस्तान ईरान का भी दोस्त है और ईरान से पाकिस्तान का काफी व्यापार चलता है। पाकिस्तान में अमेरिकी निवेश तक तो बात ठीक है लेकिन इतना ज्यादा मेल-मिलाप तो ईरान को नापसंद हो रहा है। क्योंकि अगर ईरान को पाकिस्तान का सीजफायर का अनुरोध पसंद आता तो वो खुलकर पाकिस्तान को इसका क्रेडिट देता। लेकिन पाकिस्तान के लिए ईरान ने एक शब्द भी नहीं कहा जबकि पाकिस्तान को अमेरिका ने तो तुरंत क्रेडिट दे दिया।

ईरान ने रख दी ये शर्त!

सीज़फायर की तारीख तो आगे बढ़ा दी गई लेकिन ईरान ने अमेरिका के साथ शांतिवार्ता के लिए एक शर्त रख दी है। जिसके मुताबिक बातचीत शुरू होने से पहले अमेरिका को नाकाबंदी हटानी होगी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका ने सीजफायर का उल्लंघन किया है। अमेरिका ने ईरान को पोर्ट (बंदरगाह) पर नाकेबंदी कर रखी है। माल से भरे हुए ईरानी जहाज पर हमले भी अमेरिका कर रहा है और चालक तक को गिरफ्तार कर रहा है। ये सीधा-सीधा सीज़फायर का उल्लंघन है। ऐसे में पोर्ट से नाकाबंदी हटे, जहाजों पर हमले रोके और गिरफ्तार चालकों को छोड़े तभी पाकिस्तान में शांतिवार्ता हो सकती है।

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