क्या दलाई लामा भी थे ‘एपस्टीन पार्टी’ का हिस्सा, आखिर क्यों आया फाइल में नाम?

एपस्टीन फाइल्स खुलते ही दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। अमेरिका में शुरू हुई आग यूरोप से होती हुई अब एशिया तक पहुंच चुकी है। इसमें सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या सच में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का नाम एपस्टीन की फाइल्स में आया है। जिसे लेकर दुनिया भर में चर्चाएं हो रही हैं। जिसके बाद तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा की टीम की तरफ से बयान भी जारी हुआ। जिसमें ये कहा गया कि दलाई लामा जेफ्री एपस्टीन से कभी मिले ही नहीं।
पूरी दुनिया को हिला रही है एपस्टीन की ये फाइल
दरअसल जेफ्री एपस्टीन एक ऐसा नाम है जिसे सुनकर दुनिया का हर सिस्टम शर्मिंदा हो रहा है। नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण, उनकी ट्रैफिकिंग, हाईप्रोफाइल डीलिंग समेत कई गुनाह 2008 में सामने आए थे। लेकिन रसूख ऐसा कि उसे सजा भी बेहद मामूली हुई। 2019 में जेफ्री एपस्टीन की मौत हो गई लेकिन उसकी मौत से ये केस जिंदा हो गया। क्योंकि उसके पास ऐसे नाम थे, जो पूरी दुनिया की राजनीति हिला सकते हैं। अमेरिकी संसद ने कानून पास किया और 19 दिसंबर को—एपस्टीन के हज़ारों दस्तावेज, ईमेल, फोटो और वीडियो सार्वजनिक कर दिए गए।
फाइल में आया हर नाम अपराधी नहीं
एपस्टीन की ये फाइल्स बताती हैं कि एपस्टीन किन-किन लोगों के संपर्क में था, किन नेताओं से मेल-जोल रखता था, किससे मिल रहा था, किससे बात कर रहा था? लेकिन यहां ये बात भी गौर करने वाली है। ये कि हर वो नाम जो इस फाइल में सामने आ रहा है वो अपराध में शामिल नहीं है। क्योंकि कई नाम एपस्टीन से बातचीत, कैलेंडर एंट्री या रिफ्रेंस से आए हैं। यानी नाम फाइल में हैं लेकिन वो अपराधी नहीं।
सवाल ये है कि क्या सच में दलाई लामा एपस्टीन के संपर्क में थे। दलाई लामा के ऑफिस से आधिकारिक बयान आया। उसमें कहा गया है कि दलाई लामा की एपस्टीन से कभी मुलाकात नहीं हुई, कोई संपर्क नहीं, उनका एपस्टीन से कोई संबंध नहीं है तो फिर ये नाम आया कैसे? ये सवाल बेहद जरूरी है। इस मामले के जानकार बताते हैं कि Epstein Files में कई नाम संदर्भों, ईमेल्स और कैलेण्डर में भी आते हैं। मतलब कोई व्यक्ति किसी के बारे में चर्चा में आया, किसी ईमेल में उसका ज़िक्र हुआ या किसी इवेंट के बीच नाम जुड़ गया तो सिस्टम उसे फाइल में डाल देता है। इसका अपराध से ZERO लेना-देना होता है।
अपनी गंदी छवि सुधारना चाहता था एपस्टीन
जानकारों का कहना है कि एपस्टीन दलाई लामा से मिलना चाहता था। क्योंकि उसे लगता था कि दलाई लामा से मिलकर वो अपनी गंदी छवि को सुधार लेगा। उसकी बिगड़ी हुई इमेज साफ-सुथरी हो जाएगी। क्योंकि दलाई लामा विश्वविख्यात धर्मगुरू हैं। बस इसलिए उनका नाम इस फाइल में जोड़ा गया। लेकिन असल में इन दोनों की मुलाकात कभी नहीं हुई। बता दें कि Epstein Files में कई बड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। यूरोप के राजकुमार, टॉप अरबपति, हॉलीवुड सितारे, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति- डोनाल्ड ट्रंप और बिल क्लिंटन। यानी सिस्टम के बड़े-बड़े धुरंधर उसके संपर्क में थे। वहीं भारत से तो फिल्म मेकर मीरा नायर का नाम भी आया था और तो और मुकेश अंबानी के भाई अनिल अंबानी का भी नाम फाइल में था। इनकी तो एपस्टीन से चैट भी वायरल हुई। जिसमें अनिल अंबानी अपने लिए लड़की का जुगाड़ कराने की बात एपस्टीन से कह रहे थे।
लेकिन यहां ये समझना जरूरी है कि फाइल में नाम आने भर का मतलब एपस्टीन के स्कैंडल में सीधे शामिल होना नहीं है और सबसे बड़ी बात, ये मामला सिर्फ अमेरिका का नहीं। पूरी दुनिया के पावर स्ट्रक्चर को एक्सपोज़ करता है। दलाई लामा का नाम आया—लेकिन सबूत ZERO.
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