रूस को छोड़कर अमेरिका से तेल खरीदेगा भारत! क्या पुतिन से खराब हो रहे रिश्ते

India Oil politics Russia or USA: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के सामने एक ऑफर रख दिया है। जिसमें भारत को वेनेजुएला का तेल खरीदने को कहा गया है। क्योंकि अमेरिका का मानना है कि जब भारत के लिए रूस ही तेल के लिए एक ऑप्शन है तो फिर उसे दूर करने के लिए वेनेजुएला को ऑप्शन क्यों ना बनाया जाए।
रूस-यूक्रेन है बड़ी वजह?
अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसी का कहना है कि इसकी वजह रूस-यूक्रेन युद्ध है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस की जेब खाली करे ताकि यूक्रेन युद्ध का फंड सूख जाए। ये मामला सिर्फ तेल का नहीं—टैरिफ का भी है। ट्रंप ने मार्च 2025 में रूस से तेल खरीदने वालों पर 25% टैरिफ थोप दिया था। फिर भारतीय उत्पादों पर भी टैरिफ बढ़ाकर 50% तक पहुंचा दिया।
रूस पर निर्भरता कम करना चाह रहा है भारत
जानकारों का कहना है कि भारत अब रूसी तेल को 12 लाख बैरल प्रतिदिन से घटाना चाहता है। इसे वो मार्च तक 8 लाख बैरल और आगे चलकर 5–6 लाख बैरल प्रतिदिन पर लाने की सोच रहा है। यानी भारत धीरे-धीरे रूस पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। इसकी वजह साफ है, वो है अमेरिका का प्रेशर और टैक्स का डबल लोड।
कौन बेचेगा वेनेजुएला का तेल?
अब सवाल ये है कि वेनेजुएल का तेल बेच कौन रहा है? ये कंपनी कौन होंगी? विटोल, ट्राफिगुरा या सीधे वेनेजुएला की सरकारी कंपनी, जिसका नाम है PDVSA. अभी तक किसी भी नाम पर आखिरी मुहर नहीं लगी है।
ऐसे में भारत का क्या स्टैंड है? ये बड़ा सवाल है। तेल के मुद्दे पर भारत बिल्कुल डिप्लोमैटिक मोड पर है। भारत कई बार कह चुका है कि हम अपने तेल के सोर्सेज में बदलाव ला रहे हैं। तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वेनेजुएला पर सीधा जवाब तो नहीं दिया। लेकिन रूस से आयात घटाने की बात उन्होंने मानी है। यानी भारत किसी एक देश पर निर्भर रहने के मूड में नहीं है….
लेकिन जानकार कह रहे हैं कि ये सब यूं ही नहीं हो रहा है। अमेरिका चाहता है कि रूस की तेल कमाई सूख जाए। क्योंकि वही पैसा यूक्रेन युद्ध में लग रहा है। भारत का आयात कम हो रहा है। ओपेक यानी तेल उत्पादक देशों के संगठन की हिस्सेदारी बढ़ रही है और नया विकल्प बनकर उभर रहा है, वेनेजुएला।
इस लिंक को शेयर करें