खत्म होगा LPG संकट! होर्मुज स्ट्रेट से ईरान ने भारतीय जहाजों को जाने की दी इजाजत

LPG Crisis Iran Israel US War: देश में LPG संकट के बीच एक राहत भरी खबर आई है। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के चलते जो होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक किया गया था। अब इसे भारत के लिए खोला जाएगा। अब ईरान ने भारत के झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत दे दी है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच बातचीत के बाद ये सहमति बनी है। मोदी सरकार की विदेश नीति और विदेश मंत्री एस जयशंकर की कूटनीति का ये कमाल अब जनता को काफी राहत दे सकता है। क्योंकि ऑइल टैंकर समेत काफी सारा माल इस स्ट्रेट पर जहाजों पर लदा हुआ है।
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे तिरंगे लगे जहाज
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने भारतीय तिरंगे लगे जहाजों को परमिशन दी है। जिसमें पुष्पक, परिमल जहाज शामिल है। कहा जा रहा है कि स्ट्रेट से अब ये 2 भारतीय टैंकर गुजर चुके हैं। यहां पर ध्यान देने वाली बात ये है कि ईरान ने सिर्फ भारत के ही जहाजों को निकालने की परमिशन दी है। जबकि अमेरिका, यूरोप के जहाज अभी भी फंसे पड़े हैं। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत में तेल की खासी किल्लत हो गई है। जिससे देश में LPG संकट गहरा गया है। बीते दिन तेल मंत्रालय ने भी ये खुलासा किया था। ढाई दिन में देश में ऑयल टैंकर आ जाएंगे, सप्लाई की कोई कमी नहीं होगी। इसके बाद आज ये खबर सामने आ गई कि ईरान ने भारतीय जहाजों को जाने की परमिशन दे दी है।
जंग के दौरान ईरान ने ब्लॉक किया होर्मुज स्ट्रेट
अमेरिका-इजरायल के ईरान पर अटैक के बाद शुरू हुए मिडिल ईस्ट में युद्ध के बाद ग्लोबल इनर्जी संकट खड़ा हो गया है। अटैक के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को रोक दिया। ईरान का कहना है कि ये जहाज अमेरिका और इजरायल के फायदे के लिए काम कर रहे हैं। वो पानी के रास्ते से सुरक्षित रूप से नहीं गुजर सकते।
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक 55 किलोमीटर चौड़ा पानी का चैनल है जो ईरान और ओमान के बीच फैला हुआ है। ये चैनल फारस की खाड़ी को अरब सागर से अलग करता है। ये दुनिया का सबसे अहम चोक प्वाइंट है। यहां से हर दिन दुनिया के कुल क्रूड ऑयल का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा आता है। ऐसे में एनर्जी सेक्टर के हिसाब से ये पूरी दुनिया के बिजनेस के लिए सबसे अहम है। इसलिए जब ईरान ने इस पर पाबंदी लगाई तो अमेरिका-यूरोप-एशिया पर तो इसका असर पड़ा ही। साथ ही इराक, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ ही ईरान को भी नुकसान झेलना पड़ा है।
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