Iran War: रूस–चीन की ईरान जंग में एंट्री! ईरानी सेना की ट्रंप को वॉर्निंग!

Russia China Entry in Iran War: ईरान-इजरायल-अमेरिका के साथ युद्ध में रूस और चीन भी शामिल हो गए हैं। चीन और रूस ईरान को मिलिट्री पॉवर का सपोर्ट भी दे रहे हैं। इसके बाद अब ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स यानी ईरानी सेना ने अमेरिका को धमकी दे दी है कि अगर उसने खर्ग आइसलैंड को को छू भी लिया तो तेल की कीमतें इस कदर चढ़ेंगी कि पूरी दुनिया का हाल बेहाल हो जाएगा।
ईरानी सेना IRGC की ट्रंप को धमकी
दरअसल ईरानी सेना IRGC का दावा है कि ईरान का “स्मार्ट कंट्रोल” पहले ही ग्लोबल ऑयल मार्केट को हिला चुका है और अगर अमेरिका ने खर्ग द्वीप (Kharg Island) पर दोबारा कदम बढ़ाया तो ऊर्जा की सप्लाई चेन की खतरनाक और अनप्रेडिक्टेबल साइकिल शुरू हो जाएगी। ईरान खर्ग द्वीप को लेकर ऐसी बातें इसलिए कह रहा है कि क्योंकि अमेरिका ने खुलकर ये कहा है कि उसने खर्ग द्वीप पर 90 से ज्यादा मिलिट्री टारगेट उड़ा दिए और तेल इन्फ्रा को अभी छोड़ दिया लेकिन जरूरत पड़ी है। तो वो ये भी उड़ा देंगे। ट्रंप के इस बयान आग में पेट्रोल डालने का काम किया। जिसके बाद ईरानी सेना ने अमेरिका को इस तरह धमकाया।
कहां है खर्ग द्वीप?
बता दें कि खर्ग द्वीप ईरान का एक छोटा सा द्वीप है जो फारस की खाड़ी में स्थित है। इस खर्ग द्वीप का क्षेत्रफल करीब 20 वर्ग किलोमीटर है। ईरान के लगभग 90% कच्चे तेल का एक्सपोर्ट खर्ग द्वीप से ही होता है। खर्ग में तेल का भंडार है। यहां के टैंकों में करीब 30 मिलियन बैरल तेल का भंडारण किया जा सकता है। यही वजह है कि अमेरिका ने ईरान के इस द्वीप पर मिसाइल हमला किया है। चीन को इस हमले से जोरदार झटका लगा है क्योंकि चीन कच्चा तेल सबसे ज्यादा ईरान से ही मंगाता है। जानकारों का कहना है कि शायद इसीलिए चीन ईरान के साथ युद्ध में साथ खड़ा हुआ है।
रूस-चीन की एंट्री पर क्या बोला ईरान?
चीन और रूस के साथ आने का खुलासा खुद अब्बास अराघची ने किया। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा है कि रूस और चीन उन्हें सैन्य मदद दे रहे हैं। यानी अमेरिका-इजरायल (US-Israel Attack on Iran) के खिलाफ इस जंग में ईरान अब अकेला नहीं है। उसके साथ दुनिया की दो महाशक्तियां रूस और चीन खड़े हैं। इस खबर से ही अमेरिका और इजरायल की धड़कनें तेज हो गई हैं। अब समीकरण दो देशों का नहीं बल्कि तीन महाशक्तियों की पावर्स का टकराव बन चुका है।
Iran's Foreign Minister Abbas Araghchi:
Russia and China are our strategic partners. And we have had close cooperation in the past, which is still continuous. And that includes military cooperation as well.
pic.twitter.com/dKkRbP450O
— Adi Baz (@AdiBazi16) March 14, 2026
इधर ट्रंप दे रहे चीन को धमकी
यहां एक और दिलचस्प बात देखने को मिली है। इधर चीन ईरान के साथ खड़ा हो गया है और उधर ट्रंप चीन पर दबाव बना रहे हैं। ट्रंप ने चीन को तेल (Donald Trump on China over Iran) की धमकी दी है और कहा कि चीन का 90% तेल इसी रूट से आता है। अगर चीन अमेरिका के साथ नहीं आया तो शी जिनपिंग के साथ होने वाली समिट कैंसल ट्रंप कैंसिल कर देंगे। ट्रंप ने साफ कहा कि उन्हें ऐसे ऑपरेटर्स चाहिए जो ईरानी तट पर दुश्मनों को खत्म कर डालें। अगर चीन पीछे हटता है तो उसके लिए अच्छा नहीं होगा। ट्रंप ने ये भी कहा कि अमेरिका ने ईरान को हमलों से इतना कमजोर कर दिया है कि अब उसके पास झेलने की ताकत खत्म हो रही है।
NATO को ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप ने सिर्फ चीन को नहीं धमकाया उन्होंने तो NATO को लपेट लिया है। नाटो से ट्रंप ने कहा है कि अगर हॉर्मुज स्ट्रेट खुलवाने में अमेरिका का साथ नहीं दिया तो NATO का भविष्य बहुत बुरा होगा। ट्रंप ने यूक्रेन का उदाहरण देकर कहा कि हमने तुम्हारे लिए रूस से लड़ाई की अब तुम हमारी मदद करो। यानी इस वक्त वेस्ट एशिया सिर्फ एक रीजनल टकराव नहीं बल्कि ग्लोबल पावर बैलेंस का फाइनल शोडाउन बनने की तरफ बढ़ रहा है। एक तरफ IRGC की ट्रंप को वॉर्निंग, दूसरी तरफ अमेरिका को चीन को वॉर्निंग और तीसरी तरफ रूस-चीन की वॉर में बैक-डोर एंट्री इस जंग को और पेचीदा और लंबा खिंचने वाला बना देगी।
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