SOG पर टीचर की ‘हत्या’ का आरोप, वायरल चैट से बड़ा खुलासा, खुद रहा था डमी कैंडिडेट

राजस्थान की राजधानी जयपुर में बुधवार शाम एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जिसने पुलिस सिस्टम की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सस्पेंड लेक्चरर मनोहर भादू ने महेश नगर इलाके में चलती ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जान दे दी। घटना के बाद उनकी कथित व्हाट्सऐप चैट और 4 पन्नों का सुसाइड नोट सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए पुलिस और SOG अधिकारियों को जिम्मेदार बताया है।
ट्रैक पर तीन घंटे पड़ा रहा शव, संवेदनहीनता की हद पार
घटना के बाद मनोहर भादू का शव करीब तीन घंटे तक रेलवे ट्रैक पर ही पड़ा रहा। हैरानी की बात यह रही कि एक के बाद एक तीन ट्रेनें शव के ऊपर से निकल गईं, लेकिन आसपास मौजूद लोगों या अधिकारियों में से किसी ने भी उसे हटाने की कोशिश नहीं की। बाद में एक राहगीर ने आगे बढ़कर शव को ट्रैक से हटाया। सूचना मिलने पर महेश नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को SMS अस्पताल की मोर्चरी भिजवाया गया।
“मैं मरा नहीं, मेरी हत्या हुई है”—सुसाइड नोट में गंभीर आरोप
मनोहर ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि “मैं मरा नहीं हूं, पुलिस नाम की चीज ने मेरी इरादतन हत्या की है। उन्होंने SOG के 'जोशीले तेवर', लगातार मानसिक दबाव और गलत मामलों में फंसाने के आरोप लगाए। नोट में मनोहर ने दावा किया— अजमेर SOG की FIR में मेरा नाम नहीं था, फिर भी जांच अधिकारी मुझे घसीटने में लगे रहे। पुलिसकर्मी मुकेश सोनी ने दूसरे अधिकारी को कहा—‘मनोहर के अलावा किसी का नाम मत डालना, इसे कई मामलों में फंसा सकते हो।’ मुझसे जबरन बयान लेने की कोशिश की गई। मनोहर ने स्वीकार किया कि 2022 से पहले उन्होंने कुछ गलतियां की थीं, लेकिन वह नया जीवन शुरू करने की कोशिश कर रहे थे। पिछले चार साल से वे दोस्तों से उधार लेकर परिवार चला रहे थे।
“गलत आरोपों ने तोड़ दिया, कोर्ट-कचहरी के खर्च संभाल नहीं पाया”
सुसाइड नोट में मनोहर ने लिखा कि वह कमजोर नहीं थे, लेकिन हर 10–20 दिन में कोर्ट की नई तारीख, महंगाई और केसों का खर्च, लगातार मानसिक दबाव....इन सबने उन्हें टूटने पर मजबूर कर दिया। उनका यह भी दावा है कि जेल में ऐसे 3–4 लोग और हैं, जिनकी “1% भी गलती नहीं”, लेकिन सिस्टम का शिकार हो रहे हैं।
परिवार के नाम भावुक संदेश
20 सदस्यों के बड़े परिवार में मनोहर ही घर के मुखिया थे। उन्होंने अपने नोट में लिखा “मेरे पांचों बच्चों, मां-बाप और पत्नी की हालत देखना। मेरी पोस्ट पर किसी को अनुकंपा नियुक्ति मिलनी चाहिए, ताकि बुजुर्ग मां-बाप का सहारा बना रहे।”
“रमेश… परिवार को साथ लेकर चलना।”
उन्होंने नोट के आखिरी में लिखा “मेरी क्षमता छीन ली गई है, वरना इतना बड़ा पाप नहीं करता।“ ये मामला गंभीर आरोपों से जुड़ा है। सुसाइड नोट सामने आने के बाद जांच टीम आरोपों की जांच कर रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस सिस्टम की दबावपूर्ण कार्यशैली मासूम लोगों को मजबूर कर रही है? इस घटना ने राजस्थान पुलिस और SOG की भूमिका पर एक बार फिर बहस खड़ी कर दी है।
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