महिलाओं के अधिकारों से डरती है कांग्रेस, महिला आरक्षण बिल पर बोले बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़

महिलाओं के अधिकारों से डरती है कांग्रेस, महिला आरक्षण बिल पर बोले बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़
जयपुर
18 Apr 2026, 05:50 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल का कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष ने जिस तरह से विरोध किया और संसद में पारित नहीं होने दिया। उससे बीजेपी अब अटैकिंग मोड में आ गई है। शनिवार को बीजेपी महिला मोर्चा का कांग्रेस और विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ (Madan Rathore) ने कांग्रेस पार्टी को महिला विरोधी बता दिया है। मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का तो इतिहास ही महिलाओं के अधिकारों के उपेक्षा करने वाला है। शाहबानो (Shah Bano case) मामला तो इसका साफ उदाहऱण है।

जब शाहबानों का अधिकार छीन लिया तो क्या इनसे उम्मीद करें- मदन राठौड़

मदन राठौड़ ने महिला आरक्षण बिल के संसद में गिरने पर कहा कि जब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने संविधान में बदलाव कर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को ही पलट दिया और एक महिला को न्याय से वंचित कर दिया तो उससे और क्या उम्मीद की जा सकती थी। कांग्रेस (Congress on Women Reservation) का ये कदम ना केवल उस महिला के साथ अन्याय था, बल्कि देश की करोड़ों मुस्लिम बहनों के आत्मसम्मान को भी आघात पहुंचाने वाला था। कांग्रेस ने महिलाओं के जीवन को सम्मानजनक और सशक्त बनाने के बजाय उन्हें “साइलेंट वोटर” के रूप में देखा। आज की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। वे उद्योग चला रही हैं, विज्ञान और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। अब वे “साइलेंट वोटर” नहीं, बल्कि देश के भविष्य को दिशा देने वाली शक्ति हैं।

मदन राठौड़ ने आगे कहा कि इस तरह के अहम विधेयकों के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। इसलिए उम्मीद की जाती है कि कांग्रेस भी इसमें सकारात्मक मदद करे लेकिन दुर्भाग्यवश, कांग्रेस को ये डर है कि महिलाओं को अधिक अधिकार देने से उनका राजनीतिक आधार कमजोर हो सकता है। इसलिए वो ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों का समर्थन करने से बचती रही है।

‘कांग्रेस को महिला अधिकारों से डर’

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बताया कि कांग्रेस को डर है कि अगर महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक अधिकार मिल गए, तो उनकी पारंपरिक वोट बैंक की राजनीति कमजोर हो जाएगी। यही वजह है कि वो महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर भी स्पष्ट और मजबूत समर्थन देने से बचती रही है।

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