अपना और पायलट का कार्टून देखकर फूटी गहलोत की हंसी, चर्चा में सतीश पूनिया और पूर्व CM की मुलाकात

Satish Poonia Ashok Gehlot Meeting: राजस्थान की सियासत में आज एक ऐसा नजारा देखने को मिला जो राजनीति के रंग-रूप को बिल्कुल नया आयाम दे गया। कल 23 फरवरी को भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और हरियाणा प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जयपुर स्थित आवास पर पहुंचे, हाथ में उनकी खुद लिखी किताब “अग्निपथ नहीं जनपथ”। लेकिन, ये मुलाकात सिर्फ किताब भेंट करने तक सीमित नहीं रही। जब सतीश पूनिया ने किताब सौंपी तो उन्होंने जो पन्ना खोला, उस पर एक व्यंग्यात्मक कार्टून छपा था – दो नेताओं का, और ऊपर चमकता हुआ शीर्षक लिखा था “संकट: विश्वास का”। ये अध्याय सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच 2020 के उस ऐतिहासिक संकट पर आधारित है, जब कांग्रेस दो खेमों में बंट गई थी, पायलट ने बगावत की, विश्वास प्रस्ताव लाया गया और पूरा राजस्थान राजनीतिक ‘बाड़ेबंदी’ में चला गया था।
सतीश पूनिया ने उठाया राजस्थान की सियासत का ऐतिहासिक हिस्सा
किताब में इस अध्याय को और भी रोचक बनाने के लिए सतीश पूनिया ने उसी पुराने प्रसंग को उठाया है जब अशोक गहलोत अपने विधायकों के साथ सूर्यागढ़ होटल में ठहरे हुए थे। तब स्थानीय लोक कलाकारों ने मंच पर वो मशहूर गीत गाया था – “बेवफा यूं तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है”। किताब में इसी गीत का व्यंग्यात्मक जिक्र है, राजस्थान के ‘जुगाड़’ और ‘जादूगर’ का मजाकिया अंदाज में वर्णन है, कांग्रेस की उस आंतरिक लड़ाई का पूरा चित्रण किया गया है। कल जब गहलोत ने ये पन्ना देखा तो उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई।
अशोक गहलोत को सतीश पूनिया ने दिया शानदार गिफ्ट!@ashokgehlot51 @INCRajasthan @DrSatishPoonia @BJP4Rajasthan pic.twitter.com/gAvhQYgbBr
— Bharat Raftar TV (@BharatRaftarTV) February 24, 2026
गहलोत को किताब दी लेकिन अभी तक पायलट को नहीं
अब सवाल ये उठ रहा है कि किताब का विमोचन तो 12 अक्टूबर 2025 में हुआ था। यानी करीब चार-पांच महीने पहले किताब बाजार में आ गई थी। फिर सतीश पूनिया ने ये किताब अशोक गहलोत को अब क्यों भेंट की? और तो और सचिन पायलट को अब तक ये किताब क्यों नहीं दी। सियासी हलकों में इसकी चर्चा जोरों पर है। कुछ कह रहे हैं – ये सियासी दोस्ती का संदेश है। कुछ का मानना है कि पूनिया जी ने जानबूझकर वो खास पन्ना खुला रखकर किताब सौंपी, ताकि गहलोत जी को याद दिलाया जाए कि कांग्रेस का वो संकट आज भी सियासत में सबक बना हुआ है। सतीश पूनिया राजस्थान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने अपनी किताब में न सिर्फ अपनी राजनीतिक यात्रा लिखी है, बल्कि 15 अलग-अलग अध्यायों में विधानसभा की कार्यवाही, कोविड काल, किसान मुद्दे, CAA से लेकर कांग्रेस की आंतरिक राजनीति तक सब कुछ व्यंग्य और तथ्यों के साथ पेश किया है।
दोनों की मुलाकात से सियासी गलियारों में चर्चा तेज
सतीश पूनिया और अशोक गहलोत की इस मुलाकात से पूरे राजस्थान की सियासत गर्म हो गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही खेमों में चर्चा है कि क्या ये सिर्फ शिष्टाचार है या 2026-27 के आगामी राजनीतिक समीकरणों का संकेत? गहलोत जी ने किताब स्वीकार की और मुस्कुराकर जवाब दिया ये खुद राजनीति के ऊपर राजनीति है। राजनीति में अक्सर कहा जाता है – दुश्मन भी एक-दूसरे को समझते हैं। कल जो दृश्य जयपुर में देखा गया, वो उसी का सबूत है। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यंग्य पर मुस्कुराना भी राजनीति का एक हिस्सा है।
इस लिंक को शेयर करें

