ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध में सीजफायर की उम्मीद? ईरान ने रखीं 6 शर्तें, ट्रंप ने भी रखीं अपनी - दोनों देश अड़ रहे

Iran Israel Us War Ceasefire Conditions: पिछले 24 दिनों से चल रहे ईरान V/s इजराइल-अमेरिका में आख़िरकार एक तरफ से युद्ध को शांत करने जैसे संकेत मिलना शुरू हो गए हैं। ईरान ने युद्ध में सीजफायर करने के लिए अपनी कुछ शर्तें सामने रखी है। ईरानी अधिकारी ने मीडिया के माध्यम से कहा कि ईरान अपनी पुरानी प्लानिंग के अनुसार ही काम कर रहा है।
सीजफायर के लिए ईरान की शर्तें –
- पूरे मिडल ईस्ट क्षेत्र में चल रहे युद्ध को ख़त्म किया जाए।
- मिडिल ईस्ट और वेस्ट एशिया में मौजूद अमेरिका के मिलिट्री बेस बंद किए जाएं।
- स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के ऑपरेशन और कण्ट्रोल के लिए ग्लोबल अप्रूवल से नए नियम और नया कानूनी ढांचा बनाए जाएं।
- ईरान के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाने वाली मीडिया एजेंसी या लोगों पर कार्रवाई हो।
- अमेरिका इंटरनेशनल मजबूती से गारंटी दे कि भविष्य में दोबारा युद्ध और हमला नहीं होगा।
- हमले में जो नुकसान हुआ, अमेरिका उसकी पूरी भरपाई करे।
ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका ये शर्तें मान लेता है, तो ईरान सीजफायर के लिए राज़ी है। लेकिन इनके बिना कोई बात नहीं होगी, क्योंकि ‘ये युद्ध हमने नहीं, अमेरिका ने शुरू किया है।’
दूसरी तरफ अमेरिका ने भी अपनी शर्तें रखी है। हालाँकि, ट्रम्प ने कई बार कहा है कि हम ईरान को ख़त्म कर देंगे, इसलिए सीजफायर की कोई उम्मीद नहीं है। लेकिन फिर भी अमेरिका धीरे-धीरे नीचे उतर रहा है।
अमेरिका की शर्तें हैं कि –
- ईरान यूरेनियम संवर्धन करना पूरी तरह से बंद कर दे।
- ईरान अपने सभी न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स को बंद करेगा।
- ईरान अगले पांच सालों के लिए अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को बंद करेगा, यानि मिसाइल या किसी भी तरह की डिफेन्स मशीनरी नहीं बनाएगा। सारी फैक्ट्रियां, प्रोडक्शन बेस और सप्लाई चेन को ख़त्म करेगा।
- अपने आस-पास के देशों के साथ वेपन कण्ट्रोल कॉन्ट्रैक्ट करेगा, जिसके तहत 1000 से ज्यादा मिसाइल नहीं रखी जाएगी।
- हिजबुल्ला, हमास जैसे लोकल ग्रुप्स को ईरान सपोर्ट करना बंद करे।
- स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर कंट्रोल को खत्म कर इसे फिर से खोले।
लेकिन इन सब के बाद भी आखिर में एक ही चीज़ पर बात आकर अटक रही है। अमेरिका का कहना है कि पहले ईरान झुके, और ईरान को चाहिए कि अमेरिका पहले झुककर शर्तें माने। एक ही बात – अगला पक्ष बिना शर्त सरेंडर करे। और दोनों ही देश इसके लिए राज़ी नहीं है।
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