युद्ध के बीच अमेरिका ने ईरानी क्रूड ऑयल पर बैन हटाया, क्या भारत में सप्लाई होगा समंदर में फंसा करोड़ों बैरल ऑइल?

युद्ध के बीच अमेरिका ने ईरानी क्रूड ऑयल पर बैन हटाया, क्या भारत में सप्लाई होगा समंदर में फंसा करोड़ों बैरल ऑइल?
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21 Mar 2026, 02:51 pm
रिपोर्टर : Dushyant

US Lifts Ban on Iranian Crude Oil: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में ज़बरदस्त हलचल मची हुई है। क्रूड ऑइल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में अमेरिका ने कच्चे तेल की कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए ईरानी क्रूड ऑयल पर लगाए बैन को हटा दिया है। अब ईरान का तेल एशिया के देशों में आसानी से सप्लाई और बेचा जा सकता है।

अमेरिका ने 30 दिन के लिए हटाया बैन

अमेरिका के फाइनेंस मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को घोषणा की कि ईरान के तेल पर लगा बैन हटाकर 30 दिनों की विशेष छूट दी गई है। यह छूट समुद्र में मौजूद ईरानी तेल को बेचने और खरीदने के लिए 19 अप्रैल तक रहेगी।

क्यों, कितना और कहाँ सप्लाई हो सकता है तेल

बेसेंट के अनुसार, ट्रम्प सरकार ने यह कदम तेल की ग्लोबल सप्लाई बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए उठाया है। अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि समुद्र में करीब 17 करोड़ बैरल ईरानी तेल फंसा हुआ है। ये तेल मिडल ईस्ट देशों के लेकर चाइना तक फैले कई जहाजों में भरा हुआ है। ये तेल पहले तक सिर्फ चाइना खरीद रहा था, लेकिन अब भारत, जापान, मलेशिया जैसे देशों को भी उपलब्ध हो सकता है। बैन हटने के बाद ये सप्लाई भारत में भी आ सकती है।

भारतीय कंपनियों का क्या रिएक्शन

बैन के हटते ही भारत की ऑइल कंपनियां हरकत में आ गयी हैं और तेल को खरीदने की प्लानिंग कर रही हैं। भारत का ऑइल रिज़र्व दूसरे देशों से काफी कम है, इसलिए यहाँ की रिफाइनरियां कोई मौका नहीं छोड़ते हुए बुकिंग में तेज़ी कर रही है – चाहे वो रूस का तेल हो या ईरान का।

इंडिया की तीन बड़ी रिफाइनरियों के सूत्रों ने बताया कि वे ईरानी तेल खरीदने के लिए सरकार के निर्देशों और भुगतान की शर्तों का इंतजार कर रहे है। भारत पहले से रूसी तेल की खरीद बढ़ा चुका है और अब ईरानी तेल से भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश में है।

ये तीसरी बार है जब अमेरिका ने ऑइल पर लगे बैन में ढिलाई दी है। हालांकि, ये छूट सिर्फ उसी तेल पर लागू है, जो समुद्र में लोडेड है, ईरान में चल रहे प्रोडक्शन पर नहीं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज की स्थिति और युद्ध के चलते ग्लोबल मार्केट में हालत अभी भी डांवाडोल बनी रह सकती है।


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