Indore: महीनों तक अटकी रही नयी पाइपलाइन की फाइल, अधिकारियों ने नहीं किये साइन, मौतों के बाद जगा निगम

Deaths by Contaminated Water in Indore: इंदौर के भागीरथपुरा में जो टूटी हुई पाइपलाइन अब तक 15 लोगों की मौत का कारण बन चुकी है, उसकी वजह प्रशासनिक विभाग की लापरवाही साबित हुई है। टूटी हुई पाइपलाइन को बदलने के लिए तो फाइल तीन साल पहले ही शुरू हो चुकी थी, लेकिन फाइल में प्रस्ताव को मंज़ूरी मिलने से लेकर काम पूरा होने तक हर अधिकारी और नेताओं ने लगातार लापरवाही बरती है। पीने के पानी में गन्दा पानी मिलना कोई आज की बात नहीं है। ये तो दो साल से भी ज्यादा समय से चल रहा था और शिकायतें भी आ रही थीं, लेकिन निगम ही इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा था।
निगम कार्यालय में पाइपलाइन बदलने के लिए जो फाइल 2022 में चलायी गयी थी, वो कुछ ऐसी ही कहानी कह रही है। फाइल के अनुसार, भागीरथपुरा इलाके में गन्दा पानी आने की शिकायतें 3 सालों पहले से प्राप्त हो रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर नगर निगम की तत्कालीन आयुक्त प्रतिभा पाल ने पाइपलाइन बदलने के लिए नयी निविदा जारी करने की शुरुआत की थी। (Bhagirathpura Pipeline Leak)
(indore municipal corporation) पाइपलाइन बदलने का काम दो फेज में पूरा होना था। पहले चरण की फाइल जुलाई 2022 में शुरू हुई थी, जिसमें पाइपलाइन बदलने के लिए 2.40 करोड़ के टेंडर की प्रक्रिया की शुरुआत हुई। इस प्रक्रिया को भी पूरा होते होते 4 महीने हो गए। 23 नवम्बर 2022 को निगम आयुक्त ने स्वीकृति के लिए फाइल जलकार्य समिति को भेजी और 25 नवम्बर को महापौर परिषद की बैठक में प्रस्ताव को मंज़ूरी मिल गयी।
(Administrative Negligence) यहाँ तक तो फिर भी काम जैसे तैसे ठीक चला, लेकिन इसके बाद तो निगम अधिकारी जैसे फाइल के ऊपर ही सो गए। फाइल में अंतिम दस्तखत करने और वर्कआर्डर जारी करने के लिए के लिए फाइल अतिरिक्त आयुक्त के पास गयी, जहाँ फाइल 2 महीने से ज्यादा तक पड़ी रही। 3 फ़रवरी 2023 को जाकर फाइल पर आयुक्त ने हस्ताक्षर किये और 6 फ़रवरी को महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने फाइल पर साइन किये। इतने गंभीर मामले में फाइल महीनों तक अप्रूवल के लिए अटकी रही।
आखिर में साइन होने के बाद टेंडर का वर्क आर्डर जारी हुआ। टेंडर की शर्तों के अनुसार, पाइपलाइन बिछाने का काम 10 महीनों में पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन ये पहले चरण का काम आज तक पूरा नहीं हुआ है। इसी के चलते भागीरथपुरा में मौतों का सिलसिला शुरू हुआ।
पहले चरण में पूरी प्रक्रिया ही कछुए की गति से हो रही थी, लेकिन दूसरे चरण में तो मानो मौत ही आ गयी। दूसरे चरण में काम करने की फाइल 12 नवम्बर 2024 को ही शुरू हो गयी थी, लेकिन पाइपलाइन का ऑफिशियल टेंडर 8 अगस्त 2025 को जारी हुआ। टेंडर में प्राप्त बोली 17 सितम्बर 2025 को खोला जाना तय था, लेकिन टेंडर नहीं खुला और न ही काम शुरू हुआ। फाइल फिर से अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया के पास अटकी रही। इस दौरान लगातार गन्दा पानी घरों में आता रहा और लोग बीमार होते गए।
जब पानी के असर से लोग मरने लगे, तब निगम के अधिकारियों की नींद टूटी। महीनों से अटका पड़ा काम तुरंत ही शुरू हुआ। 30 दिसम्बर 2025 को रोहित सिसोनिया ने तुरंत हस्ताक्षर किये और अगले ही दिन टेंडर खुला, और वर्क आर्डर भी दे दिया गया। जो काम महीनों में नहीं हुआ, वो एक ही दिन में पूरा हो गया।
अब खबर आ रही है कि मामले में सरकार ने भी कुछ कदम उठाये हैं। शुक्रवार रात सरकार ने नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को हटाकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव बना दिया है। साथ ही, एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
इस लिंक को शेयर करें