Indore: "घंटा" बोलने वाले मंत्री पर कार्रवाई नहीं, लेकिन आदेश में "घंटा" लिखने पर SDM निलंबित, मौत के आंकड़ों को भी गलत बता रही सरकार

Indore Contaminated Water Case, SDM Suspended: कुछ दिनों पहले इंदौर में दूषित पानी पीने हुई मौतों के मामले में कैलाश विजयवर्गीय ने एक पत्रकार से कहा था कि “फ़ोकट के सवाल मत पूछो” और “घंटा” जैसे शब्द का प्रयोग किया था। घंटा कहने को लेकर भले ही कैलाश विजयवर्गीय पर कोई कार्रवाई नहीं हुई हो, लेकिन इस ‘घंटा’ का ज़िक्र सरकारी आदेश में करने के चलते बिहार में एक एसडीएम (SDM) को निलंबित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि जारी किये गए आदेश में प्रशासनिक भाषा की जगह राजनैतिक भाषा का उपयोग किया गया, सरकार विरोधी आरोप लगाये गए, गलत आंकड़े दिखाए गए और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गयी। प्रकरण की गंभीरता के चलते उज्जैन के संभागीय आयुक्त आशीष सिंह ने SDM आनंद मालवीय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। (Kailash Vijayvargiya ghanta remark)
पूरा मामला कुछ इस प्रकार है कि इंदौर में गन्दा पानी पीने की वजह से कई लोगों की मौत को लेकर 1 जनवरी को जब एक पत्रकार ने कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल पूछने चाहे, तो मंत्रीजी ने ये कह कर टाल दिया कि “फ़ोकट के सवाल मत पूछो” और इसके साथ ही पत्रकार को “घंटा” जैसे अभद्र शब्द कहे। इसको लेकर 4 जनवरी को कांग्रेस द्वारा प्रदर्शन किया जाना था। स्थानीय कांग्रेस प्रभारी द्वारा एक दिन पहले ही प्रदर्शन करने की सूचना SDM कार्यालय में दे दी गयी। इसलिए प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान कानूनी व्यवस्था को बनाये रखने हेतु अधिकारियों की ड्यूटी लगाने के लिए SDM कार्यालय से आदेश जारी हुआ।
3 जनवरी को देवास एसडीएम कार्यालय से आदेश क्रमांक 44/रीडर-1/2026 जारी हुआ, जिसमें इस्तेमाल की गयी भाषा विवादित हो गयी। आदेश में कैलाश विजयवर्गीय द्वारा “घंटा” कहना अमानवीय और निरंकुशता की निशानी बताया गया और घंटा बजाकर विरोध प्रदर्शन की बात लिखी थी। ये है वो आदेश, जो SDM कार्यालय से जारी हुआ था-
आदेश के जारी होते ही इसकी भाषा और सामग्री पर सवाल उठने लगे। आम तौर पर ऐसे आदेशों में सिर्फ प्रदर्शन की जानकारी और ड्यूटी का विवरण शामिल होता है। लेकिन इस आदेश में प्रशासनिक भाषा की लीक से हटकर भाषा राजनैतिक हो गयी, जो विवाद का कारण बन गया। SDM के आदेश में कांग्रेस के ज्ञापन का एक अंश हूबहू शामिल कर लिया गया, जिसे वरिष्ठ अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही बताया। राजनैतिक खेमे से भी इस प्रकार के आदेश की निंदा की गयी। इसके साथ ही कहा गया कि सरकार के पास केवल 4 मौतों का आंकड़ा है। इससे अलग 14 मौतों का गलत आंकड़ा लिखना भी अधिकारी की लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना रवैया दर्शाता है।
(SDM Suspended over "Ghanta") कुछ ही देर में मामला उच्च स्तर पर भोपाल पहुँच गया और मामले की रिपोर्ट तलब की गयी। प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज़ हो गयी कि एक उच्च स्तर के अधिकारी से ऐसी चूक कैसे हो गयी। बात फैलने के कुछ ही देर में उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए SDM आनंद मालवीय को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। SDM कार्यालय में आदेश के ड्राफ्ट और टाइपिंग से जुड़े कार्य में सहायक ग्रेड-3 अमित चौहान की भूमिका होने के कारण देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने अमित चौहान को भी निलंबित कर दिया।
हालांकि, देवास से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनोज रजानी ने निलंबन पर सवाल उठाते हुए कहा कि एसडीएम को बलि का बकरा बनाया गया है। जब मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर घंटा कहा, तो उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और मुख्यमंत्री ने चुप्पी साध ली, लेकिन जब एक अधिकारी से त्रुटिवश ये शब्द लिखा गया, तो उन्हें निलंबित कर दिया गया।
कैलाश विजयवर्गीय, जिसने खुद पहले ‘घंटा’ कहा था, ने इस पर कहा कि लोक सेवकों का ऐसा व्यवहार कतई स्वीकार्य नहीं है।
साथ ही, सरकार केवल 4 मौतों के आंकड़े को स्वीकार रही है। उनके अनुसार 14 मौतें नहीं हुई है, जबकि खुद स्थानीय महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि उनके पास इस मामले में 10 मौतों की जानकारी है।
इस लिंक को शेयर करें