लोकसभा में बवाल! कागज फेंकने वाले 8 विपक्षी सांसद सस्पेंड, बोले- ये सरकार शाखा चला रही है क्या?

8 MPs suspended from Lok Sabha Session 2026: लोकसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान विपक्ष के 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। स्पीकर की कुर्सी की तरफ कागज फेंकने की वजह से 8 विपक्षी सांसदों पर अनुशासनहीन व्यवहार करने और हंगामा मचाने का आरोप लगा, जिसके बाद उन्हें बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। इनमें 7 कांग्रेस और 1 CPI(M) के सदस्य शामिल हैं। (Budget Session 2026)
यह घटना मंगलवार दोपहर को हुई, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवाणे की अप्रकाशित किताब (Book of Manoj Mukund Naravane) के कुछ हिस्से पढ़कर सदन के सामने रखने चाहे, लेकिन बीजेपी के नेता और सभा अध्यक्ष ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। इससे नाराज हुए विपक्ष के सांसदों ने सदन में नारेबाजी की, कागज फाड़े और स्पीकर की कुर्सी पर कागज़ फेंके। सभापति की भूमिका निभा रहे TDP सांसद कृष्णा प्रसाद टेन्नेटी ने बताया कि कुछ सदस्यों ने उन्हें 'यार' कहकर संबोधित किया और जब उन्होंने आपत्ति जताई, तो वे आक्रामक हो गए। उन्होंने कहा, "यह संसद की गरिमा का अपमान है।"
निलंबित 8 सांसदों में मनिकम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, अमरिंदर सिंह राजा वरिंग, हिबी ईडन, चमला किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत यादोराव पडोले, डीन कुरियाकोस (कांग्रेस) और एस वेंकटेश (CPI-M) शामिल हैं।
लोक सभा में चर्चा के दौरान विपक्ष के 8 सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया और सदन में हंगामा करते हुए अध्यक्ष की कुर्सी पर कागज़ उछाल दिए। हंगामे के चलते अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। 3 बजे बाद लोकसभा सदन फिर से शुरू होने पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सांसदों के खिलाफ निलंबन का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने मंजूर कर लिया और 8 सांसदों को बाकी रहे सत्र से निलंबित कर दिया।
सांसदों के निलंबन के बाद राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने संसद परिसर में ही आठों सांसदों के साथ विरोध प्रदर्शन किया। निलंबित सांसद मणीकम टैगोर ने कहा कि हम बाहर बैठकर ही धरना देंगे। कल जब राहुल गाँधी ने सदन में बोलना शुरू किया, तो ये कहकर कि बात प्रमाणित नहीं है, उन्हें बोलने से रोक दिया गया। आज जब बात का प्रमाण साथ लेकर आये हैं, तो आज उन्हें बोलने ही नहीं दिया गया। ये सरकार शाखा चला रही है क्या?
विपक्ष ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया और कहा कि कई ज़रूरी मुद्दों पर उन्हें बोलने का मौका ही नहीं दिया जा रहा है। सत्र के दौरान सदन कई बार स्थगित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संसदीय कार्यवाही पर असर पड़ेगा।
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