WED, 04 FEBRUARY 2026

UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे, कहा- इसका दुरुपयोग होगा, सरकार से मांगा जवाब

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राष्ट्रीय
29 Jan 2026, 02:30 pm
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रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

Supreme court stay on UGC Law New Rule: आखिर वही हुआ जिसके कयास लगाए जा रहे थे। UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा हथौड़ा चलाया कि पूरा मामला हवा में उलटा लटक गया। कोर्ट ने साफ कहा कि ये नियम अस्पष्ट है, साफ नहीं है। जिससे इसका दुरुपयोग हो सकता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया। UGC के नए नियम देशभर में विवाद की वजह बने हुए थे और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें लेकर गंभीर सवाल उठा दिए हैं।


CJI सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई में कहा कि UGC के नए नियम अस्पष्ट हैं। अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए कहा कि 2012 के नियम फिर से लागू होंगे। यानी सरकार का नया रेगुलेशन फ़िलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है।


कोर्ट ने की गंभीर टिप्पणी


सुनवाई करते हुए जस्टिस बागची ने सवाल उठाया कि जब 3E पहले से मौजूद है तो 2C की जरूरत कैसे पड़ गई। यानी साफ संदेश साफ था कि नए नियमों में कॉन्सेप्ट ही कन्फ्यूज्ड है। सुनवाई के दौरान कोर्ट का टोन और भी सख्त हुआ है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि 75 साल बाद भी हम समाज को जातियों के जंजाल से मुक्त नहीं कर पाए हैं। जस्टिस बागची ने अमेरिका का एग्जांपल देते हुए कहा कि हमें उम्मीद है कि हम उस दौर तक न जाएं जहां नस्लों के आधार पर अलग-अलग स्कूल बनें।


इधर याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि हम UGC एक्ट की धारा 3(C) को चुनौती दे रहे हैं, ये असंवैधानिक है। ये मान लेता है कि जनरल कैटेगरी के छात्र भेदभाव करते हैं। उन्होंने कहा कि ये रेगुलेशन सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदर्शों के खिलाफ है। ये समाज में बैर बढ़ाएगा।






हम पीछे जाने वाले समाज नहीं


रैगिंग पर चर्चा के दौरान CJI बोले कि दक्षिण भारत या पूर्वोत्तर के बच्चों को लेकर टिप्पणियां क्यों हो रही हैं? भगवान के लिए, आज इंटर-कास्ट मैरिज होती हैं, हॉस्टल में सब साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि हम पीछे जाने वाला समाज नहीं बन सकते। CJI ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि कुछ प्रतिष्ठित लोगों की कमेटी बनाई जाए जो पूरे मुद्दे की समीक्षा करे ताकि समाज बिना विभाजन के आगे बढ़ सके।

कोर्ट के इन टिप्पणियों से साफ है कि ये मामला सिर्फ काग़ज़ी नहीं बल्कि समाज की नसों तक पहुंच चुका है। अब 19 मार्च की सुनवाई तय करेगी कि ये नियम कानून बनेगा या इतिहास।


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