कांग्रेस ने लगाई रोत की पार्टी में सेंध, संरक्षक मणिलाल गरासिया समेत 10 नेताओं ने छोड़ी BAP

Rajkumar Roat: राजस्थान की राजनीति में आज ऐसा धमाका हुआ है जिसकी गूंज सिर्फ बांसवाड़ा ही नहीं, जयपुर तक सुनाई दे रही है। वो है भारत आदिवासी पार्टी यानी BAP में कांग्रेस की सेंध। जी हां, पार्टी के संयोजक संरक्षक मणिलाल गरासिया समेत 10 BAP नेताओं ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। खुद PCC अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) और प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा ने गरासिया का माला पहनाकर पार्टी में स्वागत किया। बल्कि BAP के अंदर की तड़कती–भड़कती राजनीति की पोल खोलने वाली है कि जो राजकुमार रोत ये सोच रहे हैं कि वागड़ क्षेत्र अब उनकी पकड़ में है। वहां पर कांग्रेस चुपचाप अपनी पैठ बना रही है और बड़ी-बड़ी सेंध लगा रही है।
मणिलाल गरासिया का बाहर होना BAP के लिए बड़ी चुनौती
जिन 10 लोगों ने BAP छोड़ी है, उसमें सबसे बड़ा नाम प्रोफेसर मणिलाल गरासिया का है। ये पार्टी के संयोजक संरक्षक थे, जो BAP की स्थापना के दौर में सबसे अहम थे। वे पार्टी के बड़े रणनीतिकार और आदिवासी समाज में मजबूत पकड़ रखने वाले थे। सिर्फ इतना ही नहीं वे भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के भी संयोजक संरक्षक रह चुके हैं। इसके अलावा वे गढ़ी विधानसभा से चुनाव भी लड़ चुके हैं लेकिन आज इन्हीं प्रोफेसर गरासिया ने BAP को अलविदा कह दिया। य़े मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि गरासिया BAP की रीढ़ माने जाते थे और वो तो अब कांग्रेस में चले ही गए और अपने साथ 9 और लोगों को ले गए। इनमें जिलाध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष और संगठन के बड़े चेहरे शामिल हैं। सबका एक ही बयान कि BAP से भरोसा उठ गया है।
BAP पार्टी में सेंध, गढ़ी विधानसभा सीट से उम्मीदवार रहे मणिलाल गरासिया सहित कई नेता हुए कांग्रेस में शामिल..!@roat_mla @GovindDotasra @INCRajasthan #RajasthanNews #Congress pic.twitter.com/r0zFkj3jfc
— Bharat Raftar TV (@BharatRaftarTV) February 15, 2026
BAP के इन नेताओं ने छोड़ी पार्टी
जिन्हें मणिलाल गरासिया कांग्रेस में लेकर गए हैं। उनमें BTP के जिलाध्यक्ष दिलीप पणदा, गढ़ी ब्लॉक अध्यक्ष नारायण बामणिया, तलवाड़ा अध्यक्ष शंकर मईडा शामिल हैं। इसके अलावा तलवाड़ा ट्राइबल मजदूर संघ के ब्लॉक अध्यक्ष सनी भाई डेंडोर, हेनरी पटेल, नितेश कतिजा, मनीष मईडा, पवन बुझ, दिनेश डाबी और गोविंद यादव शामिल हैं। इसके अलावा कई और पदाधिकारियों ने भी BAP छोड़ दी है और कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। ऐसे में इस बात पर गौर करना चाहिए कि इतनी बड़ी तादात में इन नेताओं का पार्टी छोड़कर जाना एक तरह से BAP की रीढ़ का डगमगाने का सख्त संकेत दे रहा है।
गरासिया ने क्यों छोड़ी राजकुमार रोत की BAP?
अब सवाल ये है कि गरासिया समेत इन नेताओं ने BAP क्यों छोड़ दी? इसका जवाब खुद गरासिया ने दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि जो BAP आदिवासियों के हितों की बात करती है। संवैधानिकता की बात करती है। वो अब नफरत और जातिवाद की राजनीति में फंस चुकी है। उन्होंने कहा कि पार्टी दिशा खो चुकी है और कुछ नेता अपनी जेब भरने में लगे हैं। जिससे आदिवासी क्षेत्र का विकास ठप पड़ा है। हालांकि गरासिया ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन एक सवाल छोड़ दिया कि वो BAP के किन नेताओं की बात कर रहे थे? कौन से नेता अपनी जेब भरने में लगे हैं? ये सवाल रोत के लिए भी है कि क्या उन्हें अब अपनी पार्टी में गहरी मॉनिटरिंग की जरूरत है? क्योंकि इधर गरासिया ने बिना लाग-लपेट के साफ शब्दों में कह दिया कि अब कांग्रेस के साथ मिलकर आदिवासी युवाओं की राजनीति बदली जाएगी। जातिवादी राजनीति को खत्म करने का वक्त आ गया है। यानी गरासिया रोत को ये चेतावनी दे रहे हैं कि अभी भी समय है पार्टी को टूटने से रोक लें वरना धीरे-धीरे वे कांग्रेस या दूसरी पार्टी की तरफ चले जाएंगे। अब राजकुमार रोत इसे किस तरह लेते हैं और वे पार्टी के लिए क्या बड़े कदम उठाते हैं ये देखने वाली बात होगी। क्योंकि ये बयान सिर्फ छोड़कर जाने का नहीं बल्कि BAP की विचारधारा पर सीधा सवाल है।
BAP के लिए क्या खड़ा होगा राजनीतिक संकट?
राजस्थान की तीसरी बड़ी राजनीतिक ताकत बनने का दावा करने वाली BAP के लिए ये बड़ा संकट है। एक तरफ जनाधार बढ़ाने का दावा और दूसरी तरफ संरक्षक और जिला टीम का जाना यानी तस्वीर साफ है, पार्टी का आंतरिक संघर्ष अब सड़क पर आ चुका है। राजस्थान की राजनीति के लिए ये सिर्फ नेता बदलने की खबर नहीं, ये उस पार्टी के टूटने की शुरुआत हो सकती है, जिसने आदिवासी राजनीति में नई उम्मीद जगाई थी। अब देखना ये है क्या BAP खुद को संभाल पाती है या फिर ये इस्तीफों की सुनामी पार्टी को बहाकर ले जाएगी?
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