ACB Action: भाई करते मजदूरी और खुद भ्रष्टाचार से बना करोड़पति, जानिए कनिष्ठ सहायक शुभकरण की असली कहानी

Bikaner ACB: राजस्थान में ACB की एक ऐसी कार्रवाई सामने आई है जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है। एक तरफ घर के तीन भाई मजदूरी और कपड़े बेचने की दुकान चलाते हैं और दूसरी तरफ इनका चौथा भाई, सरकारी ‘बाबू’, यानी कनिष्ठ सहायक शुभकरण परिहार… सालों से भ्रष्टाचार की मशीन बनकर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करता रहा। बीकानेर में ACB ने शुभकरण परिहार के घर पर छापेमारी में जो कुछ खुलासा किया वो सिस्टम के लिए कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
ACB को शुभकरण के घर पर मिला करोड़ों का खजाना
ACB की टीम को परिहार के घर से 76 लाख रुपये कैश, 1.5 किलो सोना, 3 किलो चांदी मिली। इतना ही नहीं बीकानेर में 3 आलीशान मकान, 2 प्लॉट, गांव में पुश्तैनी जमीन के अलावा एक और मकान मिला। इसके अलावा टीम को करीब 100 बीघा खेती की जमीन के दस्तावेज भी मिले हैं। शुभकरण के पास से स्कॉर्पियो, स्विफ्ट, बोलेरो कैंपर समेत कई गाड़ियां भी मिलीं। साथ ही करोड़ों रुपए के लेन-देन वाली फाइलें, रसीदें, नोटबुक बहुत कुछ ACB के हाथ लगा।
एक कनिष्ठ सहायक के पास इतना सहब कुछ मिलना अधिकारियों को भी नहीं पच रहा है। छापेमारी में शुभकरण के घर से उसकी वैध आय से 938% ज़्यादा संपत्ति मिली है। गौर करने वाली बात ये है कि शुभकरण परिहार पूनरासर गांव का रहने वाला है। उसका बैकग्राउंड बेहद साधारण हैं। उसके पिता गांव में अलग रहते हैं। तीन भाई मजदूरी और कपड़े बेचने का काम करते हैं। लेकिन ये साहब भ्रष्टाचार का साम्राज्य खड़ा कर उसका राजा बन बैठे हैं।
बीकानेर में एसीबी की कार्यवाही
राजस्थान के बीकानेर में ACB की रेड के दौरान एक कनिष्ठ सहायक के घर से ऐसी संपत्ति मिली, जिसने सबको चौंका दिया। ACB ने शुक्रवार सुबह कनिष्ठ सहायक शुभकरण परिहार के पांच ठिकानों पर छापा मारा, जहां से करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपये का एक किलो सोना, लगभग 5… pic.twitter.com/Pod13k1UnL
— Ashok Shera (@ashokshera94) February 13, 2026
कैसे मिली ACB को पोल?
दरअसल ACB मुख्यालय जयपुर को सीक्रेट तरीके से एक शिकायत मिली। जिसके बाद में टीम ने जांच शुरू की। फिर परत दर परत घोटाले का पहाड़ खुलता चला गया। DIG भुवन भूषण यादव की मॉनिटरिंग में 5 टीमों ने 6 जगहों पर रेड डाली और काले धन का पूरा साम्राज्य पकड़ लिया।
शुभकरण 2010 में रोजगार सहायक की नौकरी पर लगा था। इसके बाद 2022 में वो कनिष्ठ सहायक बन गया। इस दौरान उसकी कानासर, पूनरासर और उदट में पोस्टिंग हुई और पोस्टिंग का फायदा उठाते हुए वो करोड़पति बाबू बन बैठा। ACB ने अपनी इस कार्रवाई में कई जगहों पर दबिश दी। ADSP विनोद कुमार ने व्यास कॉलोनी और पूनरासर में, महावीर प्रसाद शर्मा ने पूनरासर में, CI इंद्र कुमार ने मातेश्वरी एंक्लेव में, DYSP किशन सिंह ने जोधपुर के कानासर और उदट में, इंस्पेक्टर आनंद मिश्रा ने गंगाशहर में ऐसा ऑपरेशन चलाया कि “बाबू” का अवैध साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह बिखर गया।
16 साल की नौकरी… और करोड़ों की संपत्ति!
ये कहानी सिर्फ एक बाबू की नहीं, सिस्टम की उस सड़ांध की है जिसमें छोटी पोस्ट पर बैठे लोग भी राजा-महाराजा बन जाते हैं। लेकिन ACB की रेड ने साफ कर दिया कि भ्रष्टाचार किसी का भी हो वो बख्शा नहीं जाएगा। अगर ऐसे लोगों पर नकेल नहीं कसी गई तो मेहनतकश भाई मजदूरी करते रह जाएंगे और भ्रष्ट बाबू सरकारी कुर्सियों पर बैठकर करोड़ों बटोरते रहेंगे।
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