जनता के सामने CM को टोकना...पार्टी और सरकार को कितना महंगा पड़ सकता है शेखावत का ये ‘एटीट्यूड’

जनता के सामने CM को टोकना...पार्टी और सरकार को कितना महंगा पड़ सकता है शेखावत का ये ‘एटीट्यूड’
राजस्थान
28 Mar 2026, 02:07 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

CM Bhajan Lal and Gajendra Shekhawat: जोधपुर में बीजेपी की अंदरूनी सियासत एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल बीते दिन एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत CM भजनलाल को ये कहते दिखाई दिए कि पहले मेरी बात सुनो। इस पर अब सियासी सरगर्मी बढ़ रही है। जानकार इसे बीजेपी में अंदरूनी टकराव बता रहे हैं और ये कह रहे हैं कि इससे पार्टी और सरकार को दोनों की छवि को नुकसान पहुंच रहा है।

जनता के सामने ये बात करने की क्या जरूरत?

विश्लेषकों के मुताबिक विवाद जोधपुर (Jodhpur News) में हुआ ये वाकया बीजेपी के लिए चुनौतियां पैदा करने वाला हो सकता है। बात यहां ये नहीं कि शेखावत ने CM भजनलाल (Bhajan Lal Sharma) से इस तरह की भाषा बोली। बात तो ये है कि उन्होंने नर्सिंगकर्मियों की समस्या CM भजनलाल को सार्वजनिक जगह पर बताई और फिर इस तरह से रिएक्ट किया कि वही नर्सिंगकर्मियों के कर्ता-धर्ता हैं, उन्हें ही जनता की चिंता है। सवाल ये है कि जब सरकार, पार्टी और कमान सब एक ही है तो फिर सार्वजनिक जगहों पर इस तरह की तनातनी क्यों दिखाई दे रही है? क्यों केंद्रीय मंत्री अपने ही मुख्यमंत्री को बीच सभा में टोकते दिखते हैं?

आखिर क्या था मुद्दा?

दरअसल बीते दिन जोधपुर दौरे के दौरान ये वाकया हुआ। नर्सिंगकर्मियों की समस्याओं के साथ केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat), CM भजनलाल शर्मा से बात कर रहे थे। जब मुख्यमंत्री ने जब कुछ कहना शुरू किया तो शेखावत ने CM को टोकते हुए कहा कि पहले मेरी बात सुनिए।

सुप्रीम कोर्ट के बात ध्यान दिए बिना पहुंच गए मांगें लेकर

गजेंद्र सिंह शेखावत नर्सिंगकर्मियों की उस मांग को उठा रहे थे, जिसमें इनकी डिमांड थी कि नर्सिंग कर्मियों, लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्टों को बोनस अंक देकर परमानेंट किया जाए। स्वास्थ्य कर्मियों को उनके एक्सपीरिएंस के आधार पर नियमित किया जाए। लेकिन गजेंद्र सिंह शेखावत शायद ये भूल गए थे कि इस पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि किसी कर्मचारी के पास 10–15 साल का अनुभव हो तो सरकारी नियुक्ति में उसे छूट मिल सकती है। अगर यही नियम उन्हें याद होता तो मंत्री को बहस नहीं करनी पड़ती। सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते और मामला वहीं खत्म हो जाता या फिर जयपुर बुलाकर अधिकारियों के साथ इनकी बात करवा देते। लेकिन इस पूरी बातचीत के लिए सार्वजनिक मंच को चुना गया।

वहीं कुछ दिन पहले शेखावत का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वे गजेंद्र सिंह शेखावत अधिकारियों को धमकाते दिखे थे। वो कह रहे थे कि अगर मेरे कार्यकर्ता के साथ किसी अधिकारी ने बदतमीजी की तो उसकी जिंदगी खराब कर दूंगा नौकरी खा जाऊंगा। हालांकि उन्होंने आगे ये भी कहा कि कार्यकर्ता के लिए भी है कि वो अधिकारियों से सम्मानजनक व्यवहार करें।


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