राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के उदयपुर दौरों पर नई राजनीतिक गर्मी, राष्ट्रपति, PM मोदी तक पहुंची शिकायत

Gulabchand Kataria: पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के लगातार उदयपुर पहुंचने को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उदयपुर के एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने सीधे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इसकी शिकायत भेज दी है। उन्होंने कहा कि गुलाबचंद कटारिया का उदयपुर में लगातार सक्रिय रहना संवैधानिक परंपराओं के उलट है।
क्या है आरोप?
अधिवक्ता और पूर्व पार्षद डॉ. विजय विप्लवी ने शिकायत की है। ये लेटर प्रेसिडेंट द्रौपदी मुर्मू के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को भी भेजा गया है। शिकायत में कहा गया है कि गुलाबचंद कटारिया अपने पद की मर्यादा नहीं रख रहे हैं। वो राजनीति में सक्रियता अभी भी दिखा रहे हैं। राज्यपाल बनने के बाद भी वो हर महीने लगभग एक हफ्ते उदयपुर में बिताते हैं। इससे स्थानीय प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
स्थानीय प्रशासन पर पड़ा बोझ
इस शिकायत लेटर में कहा गया है कि राज्यपाल की यात्रा के दौरान पूरा प्रशासनिक ढांचा सुरक्षा और प्रोटोकॉल में बिज़ी हो जाता है। इससे जनता से जुड़े काम प्रभावित होते हैं। उदयपुर की संकरी सड़कों पर VVIP मूवमेंट के दौरान घंटों जाम की स्थिति बनती है। इससे आम लोगों का सफर मुश्किल हो जाता है।
जनता दरबार और डायरेक्ट दखल का आरोप
डॉ. विप्लवी ने लेटर में दावा किया कि कटारिया उदयपुर में जनसुनवाई भी कर रहे हैं। आरोप है कि इस दौरान वे स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को सीधे निर्देश देते हैं, जबकि ये राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। विप्लवी ने इसे संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन बताया है। इसके अलावा, छोटे स्तर के नगर निगम कार्य, जैसे टेम्पो स्टैंड पर शेड के जीर्णोद्धार का लोकार्पण करने को भी राज्यपाल पद की गरिमा के उलट बताया गया है।
दीक्षांत समारोहों में मौजूदगी पर भी आपत्ति
लेटर में ये भी जिक्र है कि उदयपुर के विश्वविद्यालयों में राज्यपाल की मौजूदगी के दौरान पंजाब के राज्यपाल के रूप में कटारिया का मंच पर आना प्रोटोकॉल के तहत नहीं है। इस शिकायत लेटर में कटारिया के पिछले कुछ विवादों का भी हवाला दिया गया है। इसमें महाराणा प्रताप को लेकर की गई टिप्पणी, जिसके लिए उन्हें सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी थी। इसके अलावा भूमि विवादों और अवैध निर्माणों में अपने कुछ करीबी लोगों को संरक्षण देने के आरोप भी लगाया गया है।
राष्ट्रपति से मांग और ‘गुजरात भेजने’ का सुझाव
शिकायत में राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि राज्यपाल पद की मर्यादा को बनाए रखने के लिए साफ-साफ निर्देश जारी किए जाएं। यहां तक कि एक सुझाव भी दिया गया है अगर कटारिया को उदयपुर आना ही है, तो उन्हें गुजरात का राज्यपाल नियुक्त कर दिया जाए, ताकि वे आसानी से उदयपुर आ-जा सकें और किसी संवैधानिक गतिविधि पर असर न पड़े।
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