बछड़े के कटे सिर पर सदन में जोरदार हंगामा, कांग्रेस की नारेबाजी के बीच गोपाल शर्मा ने दी विधायकी छोड़ने की चुनौती

Rajasthan Vidhansabha: जयपुर में सिविल लाइंस इलाके में बछड़े के कटे सिर का मुद्दा आज विधानसभा में जोरदार तरीके से गर्माया। इस पर कांग्रेसियों ने इतना हंगामा किया कि 1 बजे तक सदन को 3 बार स्थगित करना पड़ा। इतना ही नहीं रफीक खान समेत बड़े कांग्रेस नेताओं ने पोस्टर्स भी लहराए और गौहत्या मामले में कार्रवाई की मांग की।
इन सबकी शुरुआत हुई हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य के सवाल से जिसमें उन्होंने गाय को राज्यमाता घोषित करने पर सवाल पूछा और गोवंशों की रक्षा करने को लेकर सरकार के उठाए कदमों को लेकर सवाल किया। इस पर पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत जवाब दे रहे थे। लेकिन फिर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सवाल दागा कि सिविल लाइंस में जो बछड़े का कटा सिर लाया गया, उस मामले में बीजेपी कार्यकर्ता शामिल हैं और उसे बीजेपी के विधायक गोपाल शर्मा संरक्षण दे रहे हैं।
1 बजे तक 3 बार स्थगित हुआ सदन
टीकाराम जूली के इस बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने हंगामा किया तो कांग्रेस नेता और आदर्श नगर विधायक रफीक खान ने गाय के कटे सिर के पोस्टर बांटने शुरू कर दिए। इस पर स्पीकर वासुदेव देवनानी ने उन्हें टोका और कहा कि ये सब प्री-प्लांड था आप सब का? लेकिन तब भी कांग्रेस नेता नहीं माने और पोस्टर लहराकर नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने गौहत्या के मामले पर कार्रवाई की मांग की। इस हंगामे के बाद सदन को पहले 12 बजे तक स्थगित किया गया फिर 12 बजे शुरू होते ही हंगामे के चलते दूसरी बार साढ़े 12 बजे स्थगित हुआ। जब साढ़े 12 बजे सदन शुरू हुआ तो कांग्रेस नेताओं की लगातार नारेबाजी के चलते 1 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित हो गई। फिर एक बजे जब कार्यवाही शुरू हुई तब भी डोटासरा, रफीक खान और जूली समेत कांग्रेसियों का हंगामा जारी रहा हालांकि तब लंच ब्रेक के लिए 2 बजे तक सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया।
कार्यवाही स्थगन के बाद डोटासरा-चांदना से भिड़े गोपाल शर्मा
इतना ही नहीं जब ये हंगामा चल रहा था तब विधायक गोपाल शर्मा इतने आगबबूला हुए कि उन्होंने सदन में ये कह दिया कि अगर इस मामले में मेरा एक भी आदमी निकला तो वे विधायकी से इस्तीफा दे देंगे। यहां तक कि जब सदन स्थगित हो गया था तब गोपाल शर्मा कांग्रेस विधायकों की बेंच तक चले गए और गोविंद सिंह डोटासरा और अशोक चांदना से तीखी बहस करने लगे। हालात हालात इतने बिगड़े कि हाथापाई की नौबत तक आ गई थी। तब संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बीच-बचाव किया। क्योंकि ये सदन के स्थगित होने के बाद हुआ इसलिए इसे प्रसारित नहीं किया गया लेकिन वहां मौजूद पत्रकारों ने इस बात की जानकारी दी। ऐसे में सवाल उठता है कि गौवंश की हत्या के इस मामले में इतनी चुप्पी क्यों है? जब सदन में ये मुद्दा उठ रहा है तो इस पर कोई जांच या कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
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