जयपुर में विराट हिंदू सम्मेलन: शिवजी की भव्य बारात, “हर हर महादेव-जय श्री राम” के उद्घोष

सनातन धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण की भावना दर्शाते हुए रविवार 15 फरवरी को जयपुर के घाट चौकड़ी बस्ती स्थित हल्दियों का रास्ता इलाके में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय निवासी, महिलाएं, युवा और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। पूरा माहौल भक्ति और हिंदू समाज की एकता की भावना से ओत-प्रोत रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 12:15 बजे एक अत्यंत भव्य शिवजी की बारात से हुई। आयोजन समिति के अध्यक्ष के नेतृत्व में सैकड़ों श्रद्धालु पारंपरिक परिधानों में सजे हुए थे। इसी के साथ, डीजे पर गूंजते भजनों, “हर हर महादेव” और “जय श्री राम” के उद्घोषों के बीच नाचते-गाते बारात निकली।
बारात के आगे रथ पर भारत माता, भगवान शिव, हनुमान जी और वानर सेना की तरह सजे बच्चे-बालिकाएं शस्त्र लिए चल रहे थे। पुरुष भगवा साफा और सफ़ेद कपडे पहने, हाथ में भगवा ध्वज थामे आगे-आगे बढ़ रहे थे। रास्ते में कई लोगों ने फूलों से बारात का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान सनातन धर्म की चेतना और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
सम्मेलन के मुख्य आकर्षण रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जयपुर प्रांत प्रचारक श्री बाबूलाल ने “समरस समाज, सशक्त राष्ट्र” विषय पर अपनी बात कहते हुए हिंदू समाज से एकता और संगठन में रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि हमारा समाज जिस तरह से टुकड़ों में बंटा हुआ है, उसे खत्म कर एकता स्थापित करनी होगी।
बाबूलाल ने कहा कि समाज में मौजूद जातिगत, क्षेत्रीय और अन्य विभाजनों को मिटाकर समाज को एक करना ही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखते हुए अनुशासन, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को पूरा करते हुए हिंदू समाज को मजबूत बनाना चाहिए। एक संगठित हिंदू समाज ही सशक्त भारत का आधार बनेगा।
कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन, प्रवचन और सामूहिक संकल्प के साथ हिंदू समाज की एकता का संदेश गूंजा।
यह सम्मेलन महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित होने के कारण और भी विशेष महत्व रखता था। आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजन हिंदू समाज में सांस्कृतिक जागरण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम हैं। समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने इस आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया।
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