LPG किल्लत से आया भूचाल! ट्रेनों तक में खाना नहीं, रंगाई-छपाई उद्योगों पर भी असर

Iran-Israel-USA War: ईरान-अमेरिका-इजरायल और मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की आग अब भारत के घरों के चूल्हे तक पहुंच गई है। सिर्फ घरों के चूल्हे ही नहीं बल्कि होटल से लेकर ट्रेनों की केटरिंग और उद्योग तक हर तरफ LPG की किल्लत का कोहराम। राजस्थान में भी हालात खराब होते जा रहे हैं। प्रदेश को रोज़ 1 लाख कमर्शियल सिलेंडर चाहिए। लेकिन सरकारी तेल कंपनियों ने सप्लाई ही आधी कर दी। नतीजा—होटल बंद, हलवाई परेशान और उद्योग ठप होने की कगार पर, खबरें आ रही हैं कि झुंझुनूं, टोंक, अलवर जैसे सूबे के कई जिलों में बुकिंग ही बंद कर दी गई और गैस एजेंसियां इसका बहाना दे रही हैं कि सर्वर डाउन हो गया है। लेकिन जनता कह रही है सर्वर नहीं, सप्लाई डाउन है।
सांगानेर के रंगाई-छपाई उद्योग पर पड़ रहा असर
LPG किल्लत का असर सांगानेर के रंगाई-छपाई उद्योग पर भी पड़ रहा है। वहां 2000 रंगाई–छपाई यूनिट्स रोज़ 3000 सिलेंडरों की प्यास में बैठी हैं। इतना ही नहीं स्टील रोलिंग मिल्स में कटिंग रुकने की नौबत तक आ गई है और तो और नमकीन–कचौरी की 40% दुकानें बंद होने की कगार पर हैं।
इधर जयपुर में तो हालत और खराब हैं। पहले एजेंसियों पर 700–800 बुकिंग आती थीं। अब 1100–1400 आती है, लेकिन सप्लाई गिरकर 400 सिलेंडर हो गई है। लोग पैनिक में सारे कनेक्शन एक साथ बुक कर रहे हैं और इसी बीच कालाबाजारी का खतरा बढ़ गया है। कुछ डीलर घरेलू सिलेंडर कमर्शियल में उड़ाने का रास्ता ढूंढ सकते हैं।
यहां समझिए LPG का पूरा गणित
दरअसल प्रदेश के 1.43 लाख कमर्शियल उपभोक्ता रोज़ 80 हजार से 1 लाख सिलेंडर मांगते हैं। मगर मिल रहा है उसका आधा, उधर निजी गैस कंपनियां मौके का फायदा उठाकर 2000 से 2100 रुपए सिक्योरिटी में सिलेंडर पकड़वा रही हैं और 10 किलो का सिलेंडर 3000–3200 रुपए में बेचा जा रहा है। प्रदेश में 25–30 हजार सिलेंडर 1600–2000 में बेचे जा रहे, यानी जनता से रोज़ 2–3 करोड़ ज्यादा वसूली की जा रही है। उधर बॉटलिंग प्लांट्स के पास सिर्फ 2–3 दिन का बैकअप बचा है और वजह, मध्य–पूर्व में चल रहा जंग। जिसकी वजह से खाड़ी देशों का उत्पादन कम हो रहा है और तेल ले जाने वाले जहाज़ों की सुरक्षा संकट में हैं। लेकिन इधर जानकार बोल रहे हैं कि हालात ठीक हो गए तो भी सप्लाई पटरी पर आने में 10–15 दिन और अगर तेल उत्पादन कम रहा तो एक महीना भी लग सकता है।
रेलवे की रसोई भी खतरे में
उधर ये गैस संकट रेलवे की रसोई तक पहुंच गया है। जयपुर, जोधपुर, अजमेर की 25 से ज्यादा ट्रेनें जिसमें वंदे भारत से शताब्दी तक शामिल हैं। इनमें ब्रेकफास्ट-लंच–डिनर मनहीं होने होने का खतरा बढ़ गया है। 50 से ज्यादा ट्रेनों में वेंडिंग सर्विस पर भी असर पड़ रहा है। IRCTC के मुताबिक बेस किचन के पास सिर्फ 72 घंटे का स्टॉक है। ऐसे में IRCTC ने आदेश निकाले कि इलेक्ट्रिक उपकरणों से खाना बनाओ, गैस बचाओ और स्थानीय स्तर पर सिलेंडर भी अरेंज करो।
एक्शन में केंद्र और राज्य सरकार
प्रदेश में इतने खराब हालातों को देखते हुए अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एक्शन में आ चुके हैं। बीते बुधवार को उन्होंने हाईलेवल मीटिंग की और गैस एजेंसियों पर सख्ती का आदेश दिया है। उन्होंने खाद्य विभाग की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। उन्होंने हर जिले में टास्क फोर्स गठित करने को कहा है। साथ ही इसकी मॉनिटरिंग टाइट रखने के भी आदेश दिए हैं। उन्होंने साफ मैसेज दिया कि घरेलू सिलेंडर की कमी नहीं होने देंगे।
दूसरी तरफ तेल-गैस की इस किल्लत पर केंद्रीय तेल मंत्रालय ने कहा है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। ढाई दिन की नॉर्मल डिलीवरी चल रही है। 25% प्रोडक्शन बढ़ाया है।
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