पचपदरा रिफाइनरी: ये थी आग लगने की बड़ी वजहें, अब सरकार को राजस्व का घाटा, लेकिन सवाल अभी भी वही कैसे हुआ हादसा

Pachpadra Refinery: मंगलवार को पीएम मोदी राजस्थान आते, बालोतरा आते, वहां पचपदरा रिफाइनरी में पहिया घुमाकर इसका उद्घाटन करते और देश को अपनी खुद की सबसे बड़ी रिफाइनरी देते। लेकिन ये घटनाक्रम फिर से एक सपना ही रह गया। पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे के महज 20 घंटे पहले रिफाइनरी में आग लग गई। जिससे 3000 करोड़ की तेल रिफाइनरी यूनिट का काफी हिस्सा फुंक गया और राजस्थान समेत देश की अपनी रिफाइनरी होने का सपना भी अधूरा गया। 79,450 करोड़ की लागत वाली इस रिफाइनरी के शुरू होने का अब ये सपना कब पूरा होगा वो तो वक्त ही बताएगा लेकिन एक बात जो हर किसी को चुभ रही है वो ये कि रिफाइनरी में आखिर इतना बड़ा हादसा हुआ तो हुआ कैसे?
यहां हम कुछ बिंदुओं को समझते हैं जैसे-
पहला, जब शासन प्रशासन को अच्छी तरह पता था कि PM मोदी 21 अप्रैल को पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन करने आ रहे हैं और उनकी सुरक्षा कड़ी की जा रही है, सड़क से लेकर सभा स्थल तक मजबूत सुरक्षा चक्र था कि परिंदा भी पर ना मार सके। तो क्या सारी सुरक्षा सभा में लगा दी? रिफाइनरी में सुरक्षा और सूझबूझ से काम क्यों नहीं लिया गया? और ऐसी कौन सा काम था जो दौरे के ठीक एक दिन पहले ही किया जाना था? क्योंकि इसका नतीजा ये हुआ कि हड़बड़ी में गड़बड़ी हुई और आग लगी।
दूसरा, पेट्रोलियम मंत्रालय ने सिर्फ पीएम मोदी के दौरे का स्थगन की ही जानकारी दी, कारण क्यों नहीं बताए? क्या पेट्रोलियम मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के दौरे स्थगन और दोबारा करने की जानकारी देने की है। तेल रिफाइनरी में आग जैसी बड़ी घटना पर मंत्रालय का ये रुख गले नहीं उतर रहा है।
तीसरा, हादसा किस वजह से हुआ, कैसे हुआ, किसकी गलती या लापरवाही से हुआ? इसे लेकर किसी की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई? राज्य और केंद्र सरकार किस पर क्या एक्शन लेगा ये अभी तक पता नहीं।
भारतीय रिफाइनरी की सुरक्षा पर 16 अप्रैल को पोस्ट
यहां एक बात और ध्यान देने वाली है कि 16 अप्रैल को US बेस्ट X हैंडलर अरविंद की तरफ से एक पोस्ट किया गया था। जिसमें कहा गया था कि भारतीय रिफाइनरियों को सुरक्षा के लिए और कदम उठाने चाहिए। आशंका है कि ग्लोबल इस्लामिक कम्यूनिस्ट डीपस्टेट अपने फायदे के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना चाहता है। इस पोस्ट पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया।
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राजस्थान पर अब क्या पड़ेगा असर?
पचपदरा रिफाइनरी में आग लगने से राजस्थान सरकार की किरकिरी तो हो रही है। साथ ही सरकार को राजस्व में भी घाटा उठाना पड़ सकता है। क्योंकि पहले ही इसके उद्घाटन में देरी से 30-40 हजार करोड़ का राजस्व अटका पड़ा है क्योंकि इस प्रोजेक्ट में केंद्र और राज्य की क्रमशः 74 और 26% की हिस्सेदारी है। ये रिफाइनरी शुरू होती तो राजस्थान को हर साल 30 हजार करोड़ से 40 हजार करोड़ मिलते। दूसरी तरफ रिफाइनरी के साथ ही 25,000 करोड़ का पेट्रोकेमिकल हब भी जुड़ा है। अगर रिफाइनरी से कच्चा माल नहीं मिलेगा तो डाउनस्ट्रीम उद्योगों का इंवेस्टमेंट भी रुक जाएगा।
और तो और इस रिफाइनरी में पहले ही 2000 कर्मचारी काम कर रहे हैं। रिफाइनरी शुरू होने के बाद बाड़मेर-बालोतरा-पचपदरा के और हजारों युवाओं को रोजगार मिलता जो अब पता नहीं कब मिलेगा।
राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के लिए बेहद अहम है पचपदरा रिफाइनरी
बालोतरा की ये पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के लिए भी बेहद अहम है। दरअसल भारत करीब 88% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। पचपदरा रिफाइनरी की खासियत ये है कि ये बाहर के तेल के साथ बाड़मेर के स्थानीय 'मंगला टर्मिनल' से निकलने वाले घरेलू कच्चे तेल को भी रिफाइन कर सकती है। अगर ये शुरू होती तो विदेश से कम तेल मंगवाना पड़ता।
पचपदरा रिफाइनरी को इस तरह से बनाया ही गया था कि यहां से रिफाइन किया हुआ तेल सीधे यूरोप भेजा जा सके। 41 देशों से आयात किया हुआ क्रूड यहां रिफाइन होगा। इसकी क्षमता भी 9 मिलियन चन सालाना है। क्योंकि अभी तक रूस का तेल रिफाइन करके भेजा जा रहा था। अब इसमें देरी का मतलब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सप्लाई में भी देरी।
हादसे का कारण हीट एक्सचेंजर से रिसाव ही या कुछ और
पचपदरा रिफाइनरी में आग की प्रारंभिक जांच में अभी तो यही सामने आया है कि हीट एक्सचेंजर में हाइड्रोकार्बन के रिसाव की वजह से आग लगी। ये एक्सचेंजर गर्म तेल को ठंडा और ठंडे तेल को गर्म करता है। जिसके लिए हाई टेंपरेचर और हाई प्रेशर लगाना पड़ता है। इसी हाईप्रेशर के चक्कर के में किसी छेद से तेल रिसना शुरू हुआ। इधर HPCL प्रबंधन ने कहा कि रिफाइनरी परिसर के क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट में आग लगी। आग कैसे लगी इसकी जांच की जा रही है। कितना नुकसान हुआ है, क्या प्रभाव पड़ा जल्द इसकी रिपोर्ट पेश की जाएगी।
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