पचपदरा रिफाइनरी: पढ़े-लिखों की जगह नासमझों से काम करा रही कंपनी? नेताओं के जुगाड़ से दी जा रही नौकरी, IIT इंजीनियर का खुलासा!

Pachpadra Refinery: बाड़मेर/बालोतरा की पचपदरा रिफाइनरी में लगी आग का धुआं अब कंपनी की कार्यप्रणाली को जद में ले रहा है। इससे अब कई चौंकाने वाली बात सामने आ रही है। जिसमें से सबसे बड़ी बात ये निकली है कि कंपनी में अब नौसिखियों को काम दिया जा रहा है। जबकि पेट्रोकेमिकल इंजीनियर्स काम के लिए भटक रहे हैं। ये बात पचपदरा के ही नौवजान बोल रहे हैं। वो भी ऐसे-वैसे नहीं बल्कि पढ़े लिखे, IIT से पास आउट इंजीनियर्स।
नेताओं के जुगाड़ से लगती नौकरी
दरअसल पचपदरा रिफाइनरी में आग लगने के बाद अब राजस्थान रिफाइनरी लिमिडेट की हायरिंग पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि आग की घटना में हीट एक्सचेंज को ऑपरेट करने में लापरवाही सामने आ रही है। एक सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक IIT पासआउट इंजीनियर कंपनी की हायरिंग पर सवाल खड़े कर रहा है। ये शख्स खुद को पेट्रोकेमिकल इंजीनियर बता रहा है। उसने कहा कि ऑन कैंपस हायरिगं बहुत जरूरी है लेकिन कंपनी है कि जाती नहीं। बच्चे रोज पूछते हैं कि नौकरी कहां है? बाड़मेर में पेट्रोकेमिल इंजीनियर की भरमार है लेकिन उन्हें स्थानीय कंपनी में ही हायरिंग नहीं मिल रही है।
नेताओं के जुगाड़ पर दी जा रही रिफाइनरी में नौकरी
इंजीनियर ने कहा कि नेता-मंत्रियों के जुगाड़ पर हायरिंग होती है। ये गलतियां ह्यूमन एरर होती है। उनका विश्लेषण करना होता है। कि क्यों ये गलती हुई। अब यहां बात ये है कि जिसे ये नहीं पता कि प्रेशर सेफ्टी रिलीज वॉल्व का पता नहीं है, वो अगर वॉल्व दबा दे तो क्या होगा? तो किस पर जिम्मेदारी तय करेंगे। कंपनी तो खुद प्रेशर में है।
युवा इंजीनियर्स की इस बात ने अब इन सवालों को हवा दे दी है कि रिफाइनरी में इंजीनियर्स या कर्मचारी भी नेताओं के जुगाड़ पर भर्ती किए जा रहे हैं। क्या मेरिट पर इंजीनियर्स की भर्ती नहीं हो रही है? क्या स्थानीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियर्स को नौकरी नहीं दी जा रही है?
पचपदरा रिफ़ाइनरी…!!!
जहाँ जुगाड़ और सिफ़ारिशों से काम होंगे….!!
वहाँ ऐसे हादसे होते रहेंगे…
जब तक मेरिट पर काम नहीं होगा…
तब तक कोई बदलाव नहीं आएगा….!!! pic.twitter.com/346OzV0lPT
— kapil bishnoi (@Kapil_Jyani_) April 21, 2026
रिफाइनरी शुरू करने का क्रेडिट लिया अब आग लगने का क्यों नहीं?
इस सवाल को विपक्ष के इस दावे से भी हवा मिली कि रिफाइनरी का काम ऐसी कंपनी को दिया गया है जिसने पहले ऱिफाइनरी का काम ही नहीं किया। दूसरी तरफ सरकार की तरफ से भी इन सब दावों, आरोपों का कोई खंडन नहीं किया जा रहा, जिससे इन्हें और ज्यादा बल मिल रहा है। जनता को इंतजार है कि कब उनके सवालों का जवाब दिया जाएगा। क्योंकि विपक्ष लगातार ये सवाल दाग रहा है कि जब रिफाइनरी बनाने और उसके लोकार्पण की बात आई थी तो बीजेपी क्रेडिट लेने में सबसे आगे थी और सारी लड़ाई भी क्रेडिट की थी और अब जब रिफाइनरी में इतना बड़ा हादसा हो गया है तब कोई इसका क्रेडिट लेने के लिए क्यों नहीं दौड़ रहा है?
रिफाइनरी के CDU यानी क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट में बीते सोमवार को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर भीषण आग लगी थी। CDU रिफाइनरी का हार्ट कहा जाता है। क्योंकि यहीं से पूरी रिफाइनरी चलती है। यहीं पर तेल रिफाइन होती है और भेजा जाता है। ऐसे में यहीं पर आग लगना वो भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के महज़ 20 घंटे पहले, बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
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