राजस्थान को मिलेंगे नए 70 MLA! 200 से 270 होंगी सीटें, क्या 'थर्ड फ्रंट' को मिलेगा फायदा?

राजस्थान को 49 साल बाद 70 नए विधायक मिलने वाले हैं। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने साफ-साफ संकेत दे दिए हैं कि जनगणना के बाद परिसीमन होगा और राजस्थान को 70 नए विधायक मिलेंगे। मतलब 200 की विधानसभा सीधे 270 पर हो जाएगी। विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी ने बीते दिन उनकी एक पुस्तक विमोचन के कार्य़क्रम में ये बयान दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में 270 विधायकों के लिए जो बड़ा हॉल चाहिए, उसका स्ट्रक्चर विधानसभा में पहले ही बन चुका है। बस परिसीमन का इंतजार है इसके बाद 270 विधायकों के बैठने का इंतजाम होगा।
बेनीवाल-रोत-नरेश मीणा के लिए गोल्डन चांस?
दरअसल परिसीमन के बाद ये वो इलाके होंगे जहां पुरानी जड़ें कमज़ोर और नए चेहरे मजबूत उभर सकते हैं। इन नेताओं के लिए ये मौका है जमीन निकालो, पकड़ बनाओ और विधायक तैयार करो। एक बात ये भी यहां गौर करने वाली है कि राजस्थान में विधानसभा सीटें बढ़ना कोई नया खेल नहीं है। 1952 में विधानसभा में 160 सीटें थीं जो 1957 में बढ़कर 176 हुईं। फिर 1967 में 184 और फिर 1977 में छलांग सीधे 200 पर। उसके बाद 49 साल तक चुप्पी। अब जैसा स्पीकर देवनानी ने कहा है..उससे बरसों बाद विधानसभा को एक बड़ा विस्तार मिलेगा।
ऐसे में अगर 2028 के चुनाव परिसीमन के बाद हुए। तो पूरा खेल नया होगा। नई सीटें, नए उम्मीदवार, नया सियासी गणित और राजस्थान की राजनीति का नक्शा ही बदल जाएगा। सूबे की जनता वो चुनाव देखेगी जो उसने बीते लंबे अर्से से नहीं देखा। ऐसे में अब नजरें टिक गई हैं सिर्फ एक चीज़ पर कि 70 नई सीटों के इस सुपर गेम में असली बाज़ी कौन मारता है? हनुमान बेनीवाल, राजकुमार रोत या नरेश मीणा?
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि ये नेता लंबे समय से राजस्थान में थर्ड फ्रंट की बात कर रहे हैं और तीनों एक साथ भी आने को कह चुके हैं। सोशल मीडिया से लेकर जमीन पर तीनों नेता अपनी मजबूत पकड़ बना रहे हैं। ऐसे में राजस्थान में आने वाले वक्त की राजनीति अब और भी दिलचस्प होने वाली है।
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