असम–केरल चुनाव में राजस्थान की एंट्री! बीजेपी के सतीश पूनिया के सामने उतरे पायलट

Rajasthan Politics: आज की सबसे बड़ी खबर देश में विधानसभा चुनाव को लेकर है। जिसमें राजस्थान की एंट्री हो गई है। जी हां, दरअसल कांग्रेस ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में राजस्थान के तीन नेताओं पर दांव लगाया है। जिसमें सबसे बड़ा और अहम नाम पायलट का है। ऐसे में ये दांव छोटा नहीं। पूरा चुनाव मैनेजमेंट। टिकट फाइनलाइजेशन और ग्राउंड स्ट्रैटेजी। इन नेताओं के हाथ में दी गई है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि पायलट (Sachin Pilot) के कंधे पर जिम्मेदारी अब एक तरह से उनकी अग्निपरीक्षा है और केरल समेत इन 3 राज्यों में कांग्रेस को टक्कर देने के लिए बीजेपी किसे मैनेजमेंट थमाएंगी। क्योंकि केरल में पहले ही बीजेपी ने सतीश पूनिया (Satish Poonia) को ऑब्सर्वर बनाकर भेजा है।
सचिन पायलट बदलेंगे पूरा खेल?
कांग्रेस ने जो पहला नाम चुनावी कैंपेनिंग के लिए दिया है वो है सचिन पायलट का जो AICC महासचिव और अब केरल के सीनियर ऑब्ज़र्वर हैं। केरल में टिकट से लेकर ग्राउंड गेम तक, हर कदम पर उनकी सक्रियता साफ दिख रही है। दूसरा नाम भंवर जितेन्द्र सिंह (Jitendra Singh) का है। अलवर से लेकर असम तक अब उन्हें असम का पूरा प्रभारी बनाया गया है। ध्यान रहे कि असम में उनका मुकाबला किसी और से नहीं बल्कि सत्ता की चालें बखूबी समझने वाले हिमंत बिस्वा सरमा से है। जो गांधी परिवार के एक तरह से दुश्मन बने हुए हैं।
नीरज डांगी भी इस लिस्ट में
तीसरा नाम नीरज डांगी (Niraj Dangi) का है। ये राज्यसभा सांसद और अब केरल की टिकट स्क्रिनिंग कमेटी के सदस्य हैं। केरल में उम्मीदवारों की सूची तय करने में वो फ्रंट-लाइन पर हैं। पिछले 4 दिनों में स्क्रिनिंग कमेटी की बैठकों की रफ्तार बढ़ी है। हर उम्मीदवार का प्रोफ़ाइल, हर पिछले चुनाव का डेटा और हर सीट का माइक्रो-कैलकुलेशन है। सब पर रिव्यू चल रहा है। केरल के लिए कई दौरों के बाद अब अंतिम चरण में नाम क्लियर किए जा रहे हैं। असम में जितेन्द्र सिंह लगातार ग्राउंड फीडबैक ले रहे हैं और केरल में पायलट–डांगी की टीम टिकट लिस्ट को आखिरी रूप देने में लगी है।
केरल में पूनिया-पायलट की दिलचस्प सियासत
सवाल अब ये है कि कांग्रेस सत्ता में लौट पाएगी? क्योंकि असम में वो दो टर्म से बाहर चल रही है। केरल में दो टर्म से बाहर है। तमिलनाडु में तो हालत उससे भी खराब है। कामराज के बाद कोई बड़ा चेहरा तक नहीं है। कांग्रेस को उम्मीद है कि इस बार कम से कम 2–3 राज्यों में सत्ता का सूखा टूट सकता है। लेकिन चुनौती कम नहीं है। कांग्रेस ये दांव राजस्थान के नेताओं पर लगाकर क्या साबित करना चाहती है? जवाब साफ है कि ये सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, जवाबदेही है जो जीतेगा वही आगे जाएगा।
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