राजस्थान की सबसे भयानक प्रथा, अंधविश्वास, डर और मौत की कहानी

राजस्थान की सबसे भयानक प्रथा, अंधविश्वास, डर और मौत की कहानी
राजस्थान
24 Mar 2026, 05:53 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

Rajasthan Dakan Pratha: कभी राजस्थान के कई गांवों में एक नाम सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते थे। वो था डाकन। इसका ऐसा डर जो अंधविश्वास से पैदा हुआ और जिसने कई निर्दोष महिलाओं की जान ले ली। कहते हैं, ये प्रथा 6-7 सौ साल पुरानी है। गांव में अगर किसी बच्चे की किसी वजह से मौत हो जाती या कोई बीमारी फैल जाए या अकाल पड़ जाए। तो उंगली उठती थी गांव की किसी भी एक महिला पर वो भी बिना सबूत, बिना तफ्तीश के। बस मान लिया जाता था कि वो डाकन हैं और डाकन का मतलब काली शक्तियों से मौत देना होता था।

किसे और क्यों बनाया जाता था डाकन?

दरअसल जब लोगों की बीमारी या कोई समस्या होती थी तो वे गांव के नीम-हकीम, तांत्रिक के पास जाते थे। जो वो कहते थे वही लोग करते थे। ये तांत्रिक कह देते थे कि ये सब एक महिला का किया-कराया है। पड़ोस में बच्चा बीमार पड़ा, घर में मौत हो गई, फ़सल खराब हो गई। हर बात पर किसी महिला को डाकन मान लिया जाता था। अक्सर ये महिलाएं गरीब, विधवा या अकेली रहने वाली होती थीं। इनकी ज़मीन और संपत्ति कोई हड़पना चाहता है। डाकन का ठप्पा लगने के बाद उनकी जिंदगी या तो यातना बन जाती थी या खत्म कर दी जाती थी। कई बार तो उसे मौत तक दे देते थे।

धीरे-धीरे इस कांड ने प्रथा का रूप ले लिया। सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में यही कहानी दोहराई जाने लगी। सदियों तक ये कुप्रथा चलती रही। इसी तरह डाकन के नाम पर महिलाओं की हत्या की जाती रही।

16वीं सदी में कुप्रथा को रोकने की हुई शुरूआत

16वीं सदी में इसे रोकने की कोशिश हुईं। राजपूत रियासतों ने इसकी शुरुआत की। उदयपुर में 1553 में सबसे पहले इसे गैरकानूनी घोषित किया गया। फिर 1853 में महाराणा स्वरूप सिंह ने खेरवाड़ा में इस पर पूरी तरह रोक लगा दी। भले ही ये कानून बन गया। इस पर कई जगह रोक लगी।

लेकिन अभी भी राजस्थान और देश के कुछ हिस्सों में ये अभी भी हो रहा है। नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो यानी NCRB के मुताबिक साल 2000 से 2016 के बीच देशभर में ढाई हजार से ज्यादा महिलाओं को डायन बताकर मार दिया गया। जिनमें काफी आदिवासी होती थीं लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है। असल संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है। क्योंकि गांवों में ऐसे मामलों की तो रिपोर्ट ही नहीं होती। कई राज्यों, खासकर असम के मोरीगांव, झारखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में ये प्रथा सबसे ज्यादा देखी गई।

अंधविश्वास के चलते आज भी हो रहे ये कांड

दरअसल अंधविश्वास आज भी कई गांवों में तर्क से ज्यादा ताकतवर है। कुछ इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं कम हैं। लोग अभी भी झोला-छाप डॉक्टर्स और ओझाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में डाकन प्रथा सिर्फ एक अंधविश्वास नहीं थी। ये उन महिलाओं की चीखें हैं जो बेगुनाह होकर भी दोषी बना दी गईं। राजस्थान और देश ने बहुत कोशिशें कीं। कानून बने, जागरूकता फैली लेकिन लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। क्योंकि समाज तभी बदलेगा जब डर और अंधविश्वास की जगह तर्क, जागरूकता और इंसानियत लेगी।


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