राजस्थान में फर्जी डॉक्टरों का भंडाफोड़! RMC रजिस्ट्रार गिरफ्तार, 25 लाख में FMGE सर्टिफिकेट?

राजस्थान में फर्जी डॉक्टरों का भंडाफोड़! RMC रजिस्ट्रार गिरफ्तार, 25 लाख में FMGE सर्टिफिकेट?
राजस्थान
26 Mar 2026, 11:34 am
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Rajasthan Fake MBBS Certificate for FMGE: राजस्थान में मेडिकल माफिया का खेल और सिस्टम की मिलीभगत, विदेश से MBBS की डिग्री, 20–25 लाख का रेट और हाथ में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट। जी हां, डॉक्टर बनने की इस काली फैक्ट्री का SOG की कार्रवाई में भंडाफोड़ हुआ है। जहां सफेद कोट के अंदर छुपे ऐसे लोग पकड़े गए, जिनके हाथ में स्टेथोस्कोप था लेकिन डिग्री फर्जी थी। लेकिन माफियाओं के इस खेल का SOG ने खुलासा कर दिया है। SOG ने कुल 18 लोग गिरफ्तार किया है। जिसमें RMC यानी राजस्थान मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रार भी शामिल है।

फर्जीवाड़े का रैकेट RMC तक

इस गिरफ्तारी में राजस्थान मेडिकल काउंसिल यानी RMC के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, तत्कालीन नोडल अधिकारी अखिलेश माथुर, विदेश से MBBS कर लौटे 15 फर्जी डॉक्टर और एक दलाल भी शामिल है। उदयपुर में डॉ. यश पुरोहित पकड़ा गया जो एक प्राइवेट अस्पताल में फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे मरीजों का इलाज कर रहा था। यानी मरीजों की जान सीधे खतरे में थी।

SOG की जांच में सामने आया कि एक फर्जी FMGE सर्टिफिकेट जारी करने का रेट तय था। 20–25 लाख रुपये प्रति उम्मीदवार इसका रेट था। बता दें कि FMGE विदेशों से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वालों के लिए भारत में लाइसेंस देने के लिए परीक्षा होती है। जिसे उम्मीदवार को पास करना होता है। क्योंकि इसके बाद ही उन्हें लाइसेंस मिल सकता था। लेकिन जो लोग इसमें फेल हो गए। उन्होंने इस रैकेट का सहारा लेकर फर्जी सर्टिफिकेट हासिल किया।

इस तरह बंटते थे 25 लाख

इस मामले में फिक्स रेट 25 लाख में से करीब 11 लाख रुपये RMC के अधिकारियों और कर्मचारियों की जेब में जाते थे बाकी दलालों में बंटता था। यानी, डिग्री फर्जी, दस्तावेज फर्जी और इन्हें वैध बनाने वाला पूरा सिस्टम भी फर्जीवाड़े में था।

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कैसे हुआ इसका खुलासा?

दरअसल शिकायत आई कि करौली में इंटर्नशिप कर रहा एक युवक पीयूष त्रिवेदी FMGE पास ही नहीं हुआ था। फिर भी इंटर्नशिप कर रहा था। सवाल उठा तो SOG की जांच शुरू हुई। पूछताछ में उसने बताया कि फर्जी प्रमाण पत्र दिलाने में देवेंद्र, शुभम और भानाराम की भूमिका है। ये तीनों भी तुरंत गिरफ्तार कर लिए गए।

जांच आगे बढ़ी तो एक बड़ा खेल सामने आया कि RMC के अंदर बैठे अधिकारी इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन दिलाने के लिए फर्जी FMGE प्रमाण पत्रों को वैध बना रहे थे। SOG ने अब तक 90 से ज्यादा ऐसे फर्जी डॉक्टर चिन्हित कर लिए हैं। जिन्होंने इन जाली सर्टिफिकेट्स से रास्ता बनाया। ये सिर्फ एक कार्रवाई नहीं ये उन लोगों पर सवाल है जिन पर मरीज भरोसा करते हैं।

अब बड़ा सवाल कि क्या अस्पतालों में भर्ती मरीजों की जांच होगी? क्योंकि पता नहीं इनमें से किसका इलाज इन फर्जी डॉक्टर्स ने किया हो। क्या RMC का पूरा नेटवर्क सामने आएगा और कितने फर्जी डॉक्टर अब भी सिस्टम में छुपे बैठे हैं? जांच जारी है और इस कहानी की परतें अभी और खुलेंगी।

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