हर हाल में 15 अप्रैल तक कराने होंगे पंचायत चुनाव, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब क्या करेगी सरकार

Rajasthan panchayat and Nikay election: राजस्थान में पंचायत चुनाव पर चल रही कानूनी बहस आखिरकार खत्म हो गई है। पंचायत परिसीमन को लेकर दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है, जिसके बाद अब राज्य में पंचायत चुनाव समय सीमा के भीतर कराने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच—जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल थे—ने स्पष्ट कहा कि चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, ऐसे में अदालत लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
क्या है विवाद?
याचिकाकर्ता जय सिंह ने राजस्थान हाईकोर्ट के 21 जनवरी 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए परिसीमन और ग्राम पंचायत मुख्यालय परिवर्तन की प्रक्रिया को गलत बताया था। उनका आरोप था कि परिसीमन के दौरान वैधानिक प्रावधानों का पालन नहीं हुआ और स्थानीय निवासियों की आपत्तियों पर ठीक से फैसला नहीं लिया गया। सबसे बड़ा विवाद ग्राम पंचायत सिल्लारपुरी के पुनर्गठन को लेकर था, जिसमें रायपुर जाटान को नया मुख्यालय घोषित किया गया था। राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि सम्पूर्ण प्रक्रिया कानून के अनुरूप पूरी की गई है। सरकार ने बताया कि सार्वजनिक आपत्तियाँ आमंत्रित की गईं, उन पर विचार हुआ और उसके बाद ही अंतिम अधिसूचनाएँ जारी की गईं।
हाईकोर्ट के फैसलों पर दखल नहीं- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट पहले ही सभी तथ्यों और रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर चुका है, और उसके निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पंचायत चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में पूरे किए जाएं। देरी केवल असाधारण परिस्थितियों में ही स्वीकार होगी। इस फैसले के बाद राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की तैयारियाँ तेज होने की संभावना है और प्रशासन अब पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ सकेगा।
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