इस साल नहीं होंगे पंचायत चुनाव! मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया क्यों हुई चुनावों में देरी

Rajasthan Panchayat Elections: राजस्थान की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पंचायत और निकाय चुनाव कब होंगे? कांग्रेस कह रही है कि सरकार डर रही है, तो सरकार कह रही है कि '100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली'। जी हां, यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कांग्रेस के आरोपों पर ऐसा पलटवार किया है कि सूबे की सियासत गरमा गई है।
चुनावों में देरी को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। लेकिन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कांग्रेस को उनके ही इतिहास की याद दिला दी। खर्रा ने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबां में झांकना चाहिए, एक दौर वो भी था जब 13-13 सालों तक पंचायत चुनाव नहीं होते थे। उन्होंने कहा कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने अभी तक अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपी है। बिना ओबीसी आंकड़ों के वार्डों का आरक्षण तय करना मुमकिन नहीं है। दूसरा SIR का काम शुरू हो चुका है, लेकिन आंकड़े आने बाकी हैं।
मंत्री ने याद दिलाया कि 2022 में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि ट्रिपल टेस्ट (OBC आंकड़ों की जांच) के बिना चुनाव नहीं कराए जा सकते। खर्रा का आरोप है कि कांग्रेस ने 2 साल तक इस पर कुछ नहीं किया, और अब उनकी सरकार इसे व्यवस्थित कर रही है।
क्या चुनाव 2028 तक टल सकते हैं?
सरकार ने चुनाव की तारीख आगे बढ़ाने को हाईकोर्ट से 6 महीने की मोहलत मांगी है। अब ऐसी में अक्टूबर के बाद होने की सम्भावना दी जी रही है। लेकिन स्कूलों में तब अर्ध-वार्षिक परीक्षाएं और प्री-बोर्ड्स शुरू हो जाते हैं और चुनावों में लगभग 70% स्टाफ टीचर्स का होता है। जिसकी वजह से ये टल सकते हैं।
अब भाजपा सरकार पहले ही 'एक देश-एक चुनाव' की पक्षधर है। अगर 2026 और 2027 के बीच भी स्थितियां साफ नहीं हुईं तो पार्टी रणनीतिक रूप से पंचायत और विधानसभा चुनाव 2028 में एक साथ कराने का बड़ा फैसला ले सकती है। ऐसे में सवाल है कि क्या 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' की ओर राजस्थान का यह पहला कदम है? या यह महज प्रशासनिक मजबूरियां हैं?
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