विधानसभा में उठा बस हड़ताल का मुद्दा: तीन दिनों में होली, खाटू मेला और मोदी की रैली पर संकट, जानिए कैसे जूझ रही है जनता

Rajasthan Private Bus Operators on Strike: राजस्थान में पिछले तीन दिनों से चल रही निजी बस ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अब सड़क से उठकर रातोरात विधानसभा में आ चुकी है। निजी बसों की हड़ताल से पिछले 3 दिनों से राजस्थान में यातायात व्यवस्था ठप हो गई है। गुरूवार को इसी मुद्दे को विपक्ष के विधायकों ने विधानसभा में उठाया। कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों ने विधानसभा में बीजेपी सरकार को घेरते हुए इस हड़ताल को उनकी ‘अकर्मण्यता’ का प्रतीक ठहराया। इसी के साथ पास आ रहे होली का त्योहार, खाटूश्यामजी का मेला और प्रधानमंत्री मोदी की रैली भी दिक्कतों में घिर सकती है।
(One India One Tax) पिछले तीन दिनों से राजस्थान की करीब 35 हजार निजी बसों के रुक जाने से लगभग 25 लाख यात्री सड़कों पर भटक रहे हैं। हड़ताल का प्रमुख कारण है बस ओपेरटर 'वन इंडिया-वन टैक्स' की डिमांड कर रहे हैं। इसके अलावा परिवहन विभाग की कड़ी कार्रवाई, भारी चालान और आरसी निलंबन जैसी चीज़ों को भी सरल करने की मांग शामिल है। ऑपरेटरों ने शुरू में 23 मांगें रखी थीं, जिन्हें घटाकर 9 कर दिया, लेकिन फिर भी सरकार से बातचीत सफल नहीं होने पर हड़ताल लम्बी खिंचती जा रही है। (Bus Strike Day 3 Rajasthan)
विधानसभा के शून्यकाल में चौमूं विधायक शिखा मील बराला ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल सिर्फ बसों का रुकना नहीं है, बल्कि साढ़े तीन लाख परिवारों के चूल्हे ठंडे होने जैसा है। मैंने सड़कों पर बेबस महिलाओं और बच्चों को भारी सामान ढोते देखा है। उनका वह बोझ सरकार की अकर्मण्यता का भार है। सरकार धृतराष्ट्र बनकर बैठी है, जबकि जनता त्राहि-त्राहि कर रही है।
(Holi Khatushyamji Mela Impact) इस हड़ताल का खाटू श्याम जी के लक्खी मेले पर भी गहरा असर पड़ रहा है। अन्य राज्यों से आए श्रद्धालु जयपुर में फंसे हुए हैं। जयपुर-खाटू रूट पर टैक्सी वाले 70 किमी के लिए 7 हजार रुपये तक मांग रहे हैं। महिलाएं और बच्चे भारी सामान के साथ परेशान हैं।
आगामी होली त्योहार से पहले यह हड़ताल यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। साथ ही, 28 फरवरी को अजमेर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली भी प्रस्तावित है, जो इस हड़ताल से प्रभावित हो सकती है। ऑपरेटरों ने साफ़ तौर पर ये ऐलान किया है कि रैली के लिए बसें उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी।
विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि उन्हें आम जनता की तकलीफ की कोई चिंता नहीं है। वो सिर्फ नरेंद्र मोदी की होने वाली रैली के लिए गंभीर है। रैली के लिए ऑपरेटरों के साथ छुपकर बातचीत तो चल रही है, लेकिन जनता की समस्या पर कोई समाधान नहीं खोज रही है। राजस्थान रोडवेज की बसें चल तो रही हैं, लेकिन उनकी संख्या काफी कम है, जिससे कई जगहों पर काफ़ी भीड़ बढ़ गई है। (Pm Modi Rally)
हड़ताल के कारण कई जगहों पर बस ऑपरेटरों के बीच हाथापाई की घटनाएं भी सामने आई हैं। परिवहन विभाग और ऑपरेटरों के बीच कोई सकारात्मक बात अभी तक नहीं हुई है। स्थिति को देखते हुए यात्री वैकल्पिक साधनों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन महंगे किराए से परेशान हैं।
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