Bharatpur: 'भारत में अनेक नहीं बल्कि एक ही संस्कृति', RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बताया क्या है हिंदुत्व?

Bharatpur: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय चेतना किसी राजनीतिक सोच नहीं, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा से निर्मित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभिव्यक्तियों की विविधता के बावजूद देश की सांस्कृतिक आत्मा हमेशा एक रही है, और इसी एकत्व की अनुभूति को भारतीयता या हिंदुत्व का रूप माना जाता है।
'भारत में सिर्फ एक संस्कृति'
रविवार को भरतपुर में आयोजित प्रमुखजन गोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रबोध और समाजबोध का विकास, भारत के भविष्य को मजबूत करने की अनिवार्य शर्त है। उनके अनुसार भारत की विशिष्ट पहचान उसकी आध्यात्मिक धारा, सतत सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक जागरूकता से बनती है, जो राष्ट्र को सशक्त और समाज को संगठित करती है।
होसबाले ने स्पष्ट किया कि भारत को "अनेक संस्कृतियों का देश" कहना भ्रामक है, क्योंकि यहां संस्कृति एक ही है— उसकी अभिव्यक्तियां जरूर भिन्न रूपों में दिखाई देती हैं। भाषा, परंपरा और जीवनशैली भले बदल जाएं, लेकिन उनके मूल में वही सांझा सांस्कृतिक भाव मौजूद रहता है, जो राष्ट्रीय एकता की मजबूत नींव है।
व्यक्ति निर्माण ही राष्ट्रीय शक्ति— होसबाले
संघ के कार्य की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्रीय चरित्र को मजबूत करने का काम करता है। ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यबोध जैसे गुण व्यक्ति के साथ-साथ राष्ट्र को भी दिशा देते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा कार्य कभी प्रसिद्धि या प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि समाजहित, समरसता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना से किए जाने चाहिए।
सामाजिक चुनौतियों पर चिंता, समरसता को बताया समय की मांग
समसामयिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए सरकार्यवाह ने कहा कि भारत विज्ञान, अर्थव्यवस्था और वैश्विक नीति जैसे क्षेत्रों में बड़ी छलांग लगा रहा है, लेकिन सामाजिक असमानता और भेदभाव जैसे मुद्दों पर सजग रहना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समाज के भीतर विभाजन राष्ट्र को कमजोर करता है और सामाजिक न्याय तथा परस्पर सम्मान को व्यवहार में लाना समय की जरूरत है।
महिला सुरक्षा, युवाशक्ति और संस्कारों पर जोर
महिला सुरक्षा को सभ्य समाज का प्रमुख संकेतक बताते हुए उन्होंने कहा कि जब तक महिलाएं सुरक्षित और सम्मानित महसूस नहीं करतीं, तब तक समाज मजबूत नहीं माना जा सकता। युवाओं को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि नवाचार बढ़ रहा है, लेकिन नैतिक चुनौतियों से निपटने के लिए युवाओं को सही मार्गदर्शन आवश्यक है।
परिवार, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता को उन्होंने राष्ट्र के दीर्घकालिक विकास से सीधे जोड़ते हुए कहा कि भारतीय समाज की मूल इकाई परिवार ही है, और वहीं विकसित संस्कार राष्ट्र की असली आधारशिला होते हैं।
संघ के शताब्दी वर्ष का उल्लेख
संघ के शताब्दी वर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित सामाजिक चेतना को मजबूत करना है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ किसी के विरोध में नहीं बल्कि संगठित समाज शक्ति के निर्माण के लिए कार्य करता है, ताकि राष्ट्र सर्वोपरि की भावना से भारत आगे बढ़ सके।
कार्यक्रम में कई प्रमुख लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में जयपुर प्रांत के प्रांत संघचालक महेंद्र सिंह मग्गो, मुख्य अतिथि के रूप में अपना घर संस्थान की संस्थापक डॉ. माधुरी भारद्वाज शामिल रहे। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधि, मजदूर संघ, ट्रांसपोर्ट संघ और विभिन्न समाजों के लगभग 400 लोग मौजूद रहे।
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