पंचायत चुनाव में TSP आरक्षण मुद्दा करेगा ‘खेला’! OBC-MBC को नाराज करने वाली सरकार?

Panchayat Nikay Election: राजस्थान में पंचायत चुनाव अभी घोषित भी नहीं हुए लेकिन सियासत का पारा उबल चुका है। TSP यानी ट्राइबल सब-प्लान एरिया की राजनीति अब पूरी तरह आरक्षण के इर्द-गिर्द घूम रही है। यहां आदिवासी सीटों पर पहले से ही बड़ा आरक्षण है लेकिन अब OBC, MBC और EWS वर्ग खुलकर मैदान में आ गया है। अब पंचायत चुनाव आने वाले हैं। सरकार कह रही है कि OBC आरक्षण की रिपोर्ट नहीं आई है। इस पर चुनाव आयोग कह रहा है कि तो फिर OBC को जनरल सीट मानकर चुनाव करा लो। यहीं से नया विवाद खड़ा हो गया।
TSP आरक्षण का मुद्दा बन रहा पंचायत चुनाव मे सिर दर्द
दरअसल TSP क्षेत्रों में OBC-MBC के आरक्षण में पहले से ही विसंगतिया हैं। जिसे लेकर बीते 2 महीनों से TSP क्षेत्रों में जबरदस्त प्रदर्शन चल रहा है। कई सियासी और स्थानीय समाज के नेताओं आरक्षण नहीं तो वोट नहीं जैसे नारे दे दिए। दो दिन पहले गुर्जर आऱक्षण संघर्ष समिति ने तो इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लेटर लिख दिया और कह दिया कि अगर आरक्षण के मुद्दे का निपटारा नहीं किया गया तो उन्हें बड़े आंदोलन पर उतरना पड़ेगा। साथ ही वे चुनाव में वोट भी नहीं देंगे।
TSP क्षेत्र में आरक्षण में कहां आ रही है विसंगति?
सियासी जानकारों का कहना है कि सरकार अब तो दोनों तरफ से फंस गई है। अगर OBC को जनरल मान कर चुनाव करा दिए तो आफत और नहीं कराए तो आफत तो है ही।
दरअसल राजस्थान में OBC वर्ग को 21% आरक्षण मिला हुआ है। MBC को 5% का मिला है, EWS को 10 परसेंट आरक्षण मिला है जो कि संवैधानिक तरीके से दिया है। लेकिन ये जो प्रावधान है वो TSP क्षेत्र में अलग है। यहां पर ST वर्ग को 45% आरक्षण है, SC को 5% आरक्षण मिला है। बाकी जो 50% सीटें हैं वो अनारक्षित। बस यही तो पूरे विवाद की जड़ है। OBC, MBC और EWS का कहना है कि हमारे हिस्से का आरक्षण इस 50% में भी क्यों नहीं दिखता।
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की क्या है मांग?
यहां एक बात समझने वाली है कि कांग्रेस, बीजेपी और BAP, तीनों बड़े दल इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इस मुद्दे पर इनका बयान, सीधे वोट बैंक को प्रभावित कर देगा। ऐसे में विजय बैंसला ये मांग कर रहे हैं कि 50% का जो अनारक्षित हिस्सा है। उसमें OBC को 10.5%, MBC को 2.5% और EWS को 5% आरक्षण दिया जाए। नहीं दिया तो भयंकर आंदोलन हो जाएगा। राजस्थान ने आरक्षण को लेकर भीषण आंदोलन अपने इतिहास में देखे भी हैं। यानी अब तस्वीर साफ है कि ये लड़ाई सिर्फ आरक्षण की नहीं, राजनीतिक ताकत के बंटवारे की है। पंचायत चुनाव से पहले ये मुद्दा किसी भी वक्त बड़ा जनआंदोलन बन सकता है। अब सभी लोग सरकार पर टकटकी लगाए देख रहे हैं कि इसका समाधान क्या और कब निकलेगा।
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