मेरा खुद का चला गया...वसुंधरा राजे का एक बयान और राजस्थान की सियासत में मच गई हलचल

Vasundhara Raje: राजस्थान की दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे कोई बयान दें और उस पर सियासी बवाल ना मचे, ऐसा तो हो नहीं सकता। यही बवाल फिर से मच गया है। वसुंधरा राजे ने अपने झालावाड़ दौरे के दौरान जनता को दिए भाषण में एक छोटी सी लाइन ऐसी बोल दी कि बीजेपी की अंदरूनी खींचतान फिर से बाहर आ गई और ये भी पता चल गया कि पार्टी में फैसले किसी भी कद्दावर नेता के मनमुताबिक नहीं होते। दरअसल यहां वसुंधरा राजे ने कहा कि आप लोग लड़ते हो कि मेरा काम नहीं हुआ...अरे यहां तो मेरा काम ही नहीं हुआ, मेरा चला गया।
मैं बचा भी नहीं सकी- राजे
वसुंधरा राजे ने झालावाड़ के मनोहर थाना में कामखेड़ा बालाजी धाम मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद परिसर के बाद जनसभा को संबोधित कर रहीं थी। इस दौरान उनके बेटे और झालावाड़-बारां सांसद दुष्यंत सिंह भी मौजूद थे। यहां लोगों को संबोधित करने के दौरान उनका CM ना बन पाने का दुख भी झलक उठा। उन्होंने कहा कि मुझे यहां लोग कहते हैं कि मेरा काम नहीं हुआ, करवा दीजिए, अरे भैया, मैं नहीं लड़ सकती हूं, जब मेरा ही चला गया और मैं बचा भी नहीं सकी।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का एक बार फिर छलका दर्द...
कल वसुंधरा राजे अपने पुत्र सांसद दुष्यंत सिंह की जन संवाद यात्रा को हरी झंडी दिखाने झालावाड़ जिले के कामखेड़ा धाम पहुंची थी.
वहां बोली लोग मेरे पास काम के लिए आते हैं कोई कहता है मुझे पेंशन नहीं मिल रही कोई कहता है… pic.twitter.com/KK5Z6BploT
— Jeetu Besla (@JeetuBesla) April 10, 2026
पार्टी और नेतृत्व से अभी भी नाराज हैं वसुंधरा?
जानकारों का कहना है कि वसुंधरा राजे का ये बयान ये साफ संकेत दे रहा है कि राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया ना जाना उन्हें अभी तक कितना खल रहा है और वो इससे अभी तक नाराज हैं। इतना ही नहीं उनका ये कहना कि कार्यकर्ता ये कह रहे हैं कि उनका काम नहीं हुआ, ये सरकार के कामकाज के रवैए को भी दर्शा रहा है। इसलिए राजे का ये स्टेटमेंट सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक गूंज रहा है। उनके इस बयान ने बीजेपी के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजे के बयान ने अब इन अटकलों को और हवा दे दी है कि वे अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर संतुष्ट नहीं हैं।
पहले भी नाराजगी जता चुकी हैं राजे
राजे का ये रूख उस निराशा का भी संकेत है जो वक्त-वक्त पर उनकी पार्टी के भीतर उनके कद को लेकर देखी जाती है। ऐसा पहली बार नहीं है कि राजे ने अपना दर्द इस तरह से बयां किया हो, इससे पहले बीजेपी के स्थापना दिवस पर भी राजे ने राजनीतिक नियुक्तिओं पर भी बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी ऐसे लोगों को ही जिम्मेदारी दे जो पार्टी के प्रति निष्ठावान हो, वफादार हों और पार्टी के संस्कार हों। दलबदलुओं को बड़ा पद देने से पहले पार्टी को सौ बार सोचना चाहिए। ये कह कर राजे ने इशारों-इशारों में ये जता दिया कि वे भाजपा संगठन और अपनी ही पार्टी के सरकार से क्या चाहती हैं।
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