महिला आरक्षण पर उड़ी राजस्थान के नेताओं की नींद? 2028 में अब सियासत में महिलाएं करेंगी खेल!

Women Reservastion in Rajasthan: 2026 की 16 अप्रैल से दिल्ली की गलियों में सियासी कंपकंपी शुरू हो गई। केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी संविधान का 106वां संशोधन लागू करने के लिए चर्चा पर हंगामा मच रहा है। हालांकि असलियत में ये परिसीमन के बाद ही लागू होगा। 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के बाद देश भर की सियासत में कई बड़े बदलाव होंगे। राजस्थान में भी महिला आरक्षण से बदलाव आएगा। क्योंकि 2028 और 2029 के चुनाव यही बदलाव बड़ी भूमिका निभाता नजर आएगा। लेकिन इस आरक्षण के नाम से ही कई स्थानीय नेताओं की नींदे उड़ रही हैं। क्योंकि कई दिग्गजों को आरक्षण लागू होने के बाद अब अपनी परंपरागत सीट छोड़नी होगी और नई जमीन पर अपनी दुकान खोलनी पड़ेगी।
महिला आरक्षण के बाद राजस्थान में बढ़ेंगी इतनी सीटें
दरअसल परिसीमन के बाद अनुमान ये लगाया जा रहा है कि विधानसभा सीटें 200 से बढ़कर 270 हो जाएंगी। लोकसभा सीटें 25 से बढ़कर 34 हो जाएंगी। इसका मतलब करीब 90 विधानसभा सीटें और 12 लोकसभा सीटें सिर्फ महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आज विपक्ष कह रहा है कि महिलाएं तैयार नहीं हैं। लेकिन हकीकत ये है कि 2023 चुनाव में 21 महिलाएं जीतकर आई थीं। आरक्षण के बाद ये आंकड़ा तो सीधा 90 तक पहुंच सकता है। यानी 4 गुना बढ़ोतरी ये सिर्फ बदलाव नहीं बल्कि सियासत की रीढ़ बदलने वाला विस्फोट है। अगर विधानसभा सीटें 270 हुईं। तो बहुमत का आंकड़ा 101 से बढ़कर 136 हो जाएगा। इससे हर पार्टी को नए समीकरण, नए गठबंधन और नई जातीय राजनीतिक परिभाषाएं बनानी पड़ेंगी।
दिग्गजों के शुरु हो गई धक-धक!
ऐसे में साफ है कि आरक्षण सिर्फ सीटों का खेल नहीं, पूरी सत्ता का समीकरण बदल देगा। अभी 30 मंत्री बन सकते हैं। लेकिन सीटें बढ़ते ही ये नंबर 40 तक जा सकता है। इसका मतलब है कि महिलाओं को सत्ता के कोर में पहुंचने का असली मौका मिलेगा। कहा ये भी जा रहा है ये हुआ तो भी क्या हो गया। मंत्री पद पर तो आरक्षण नहीं है लेकिन जब 90 महिलाएं सदन में होंगी। तो दवाब अपने आप बढ़ेगा। महिलाएं मार्जिन नहीं, मेनस्ट्रीम बनेंगी। 34 सीटों में से लगभग 12 सीटें महिलाओं के लिए। अभी राजस्थान की संसद में महिलाओं की संख्या सिर्फ उंगलियों पर गिनने लायक है। और तो और सबसे बड़ी बात तो ये है कि आरक्षित सीटें हर चुनाव में रोटेट होंगी। मतलब आज आपकी सीट रिज़र्व है। लेकिन 5 साल बाद ये नहीं होगा और जो आज सामान्य सीट है वो, अगले चुनाव में रिज़र्व हो सकती है। ऐसे में किस नेता को कब झटका लगे। ये कोई नहीं जानता। राजनीतिक भविष्य अब स्थिर नहीं। हर 5 साल में हिलने वाला है। सवाल ये भी है कि कई जिलों में अभी महिला नेतृत्व बेहद कम है। ऐसे में अब पार्टियों को योग्य महिला कैंडिडेट ढूंढने के लिए रातें जलानी पड़ेंगी और दूसरी तरफ इस बात की भी सबसे ज्यादा संभावना है कि नेता खुद नहीं लड़ पाएंगे तो अब पत्नी या बेटी को चुनावी मैदान में उतारेंगे।
संसद में पीएम मोदी ने भी कहा था कि महिलाओं को हक देना आज की जरूरत नहीं बल्कि उनका अधिकार भी है और बिना किसी पुरुष की सीट घटाए, 33% हिस्सा महिलाओं को दिया जाएगा।ये बयान विपक्ष के सवालों पर सीधे प्रहार था।
ऐसे में अब 2028 और 2029 के चुनावों में कौन सीट बदलेगा, कौन टिकट गंवाएगा, और कौन नया चेहरा सियासत में चमकेगा, ये सब तय करेगी 33% महिलाओं की ताकत। आज सवाल यही है कि क्या राजस्थान पुरानी राजनीति से बाहर आकर एक नए महिला-प्रधान दौर में कदम रखने के लिए तैयार है?
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