राजस्थान का प्रमुख त्योहार गणगौर; आखिर क्यों है प्रेम और तपस्या का प्रतीक? 21-22 मार्च को कहाँ होंगी शोभायात्राएं

राजस्थान का प्रमुख त्योहार गणगौर; आखिर क्यों है प्रेम और तपस्या का प्रतीक? 21-22 मार्च को कहाँ होंगी शोभायात्राएं
धर्म
20 Mar 2026, 08:11 pm
रिपोर्टर : Dushyant

हर साल राजस्थान में गणगौर का भव्य आयोजन किया जाता है, जिसमे गणगौर (माँ गौरा) और ईसर (भगवान शिव) की प्रतिमा बनाकर इनकी पूजा की जाती है। इस साल यह उत्सव 21 व 22 मार्च 2026 को बनाया जायेगा। आइये जानते हैं कि क्या है गणगौर के पीछे की मान्यता और इस बार कहाँ-कहाँ इसकी शोभायात्रा निकलेगी।

क्यों मनाया जाता है गणगौर, क्या है इसका धार्मिक महत्व?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए अन्न जल का त्याग कर दिन रात घोर तपस्या की थी। पार्वती के इसी प्रेम और लगन से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। उनके इसी मिलन के प्रतीक के तौर पर गणगौर मनाया जाता है।

कैसे मनाया जाता है गणगौर? क्या है गणगौर की मान्यता?

गणगौर राजस्थान का एक खास त्योहार है जिसमें घर की महिलाएं लगभग 16-18 दिन तक ईसर और गणगौर की मिटटी की मूर्तियाँ बनाती है, उन्हें अलग-अलग कपडे पहनाती है और उनकी पूजा कर कई प्रकार के भोग चढ़ाती है। साथ ही, शाम को ढोल-नगाड़ों के साथ इनकी शोभायात्रा (जिसे बिंदोरी कहते हैं) निकाली जाती है। इसमें विवाहित महिलाएं और कुंवारी लड़कियां 16 दिनों तक पूजा करती हैं, मेहंदी लगाती हैं और पारंपरिक लोकगीत गाती हैं। राजस्थान के कई शहरों में वहां के राजपरिवारों द्वारा गणगौर की भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाती है।

कहाँ निकलती है गणगौर की यात्रा?

गणगौर के मौके पर राजस्थान में कई जगह शोभायात्रा निकलती है। जयपुर, उदयपुर, जोधपुर जैसे कई प्रमुख शहरों में भव्य समारोह का आयोजन होता हैं। जयपुर में मुख्य रूप से गणगौर की शोभायात्रा यहाँ के राज परिवार द्वारा निकाली जाती है, जिसमें जयपुर के सैकड़ों लोग शामिल होते हैं। राजधानी होने के साथ ही जयपुर उत्साह का केंद्र है। यहाँ इस साल गणगौर की सवारी त्रिपोलिया गेट से होते हुए परकोटे की गलियों में घूमती है। इसमें लोक नृत्य, शाही ऊंट, घोड़े और प्राचीन पालकी भी शामिल होती है।

हर बार की तरह इस बार भी जयपुर में धूमधाम से ये यात्रा निकाली जाएगी। उदयपुर में भी गणगौर की यात्रा सिटी पैलेस से पिछोला झील के गणगौर घाट तक निकलेगी, जिसका समापन मूर्तियों के नौका जूलूस के साथ होगा। वहीं, जोधपुर, जो अपने अनूठे ढिंगा गावर परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें महिलाएं विभिन्न वेशभूषा में सुंदर कपडे पर लोक गीत गाते हुए गणगौर की सवारी निकालती हैं।


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