कोल्ड ड्रिंक्स का भी बाप है ये देसी ड्रिंक, नाम सुनकर यूपी-बिहार वालों का पिघल जाएगा दिल

कोल्ड ड्रिंक्स का भी बाप है ये देसी ड्रिंक, नाम सुनकर यूपी-बिहार वालों का पिघल जाएगा दिल
लाइफ स्टाइल
30 Mar 2026, 05:29 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

Sattu Benefits: आप भी उन लोगों में से हैं, जिन्हें गर्मी आते ही ठंडा शरबत या कोल्ड ड्रिंक पीने का दिल करता है? लेकिन शरबत आपको ठंडक तो दे सकता है, पर ऊर्जा नहीं। गर्मी की चिल-चिलाती धूप और गर्म हवा अक्सर हमें डिहाइड्रेट (dehydrated) कर देती है। लेकिन अब घबराने की बात नहीं क्योंकि हमारे घर में मिलने वाला एक ऐसा पाउडर जो खुद में ही एक संतुलित आहार का काम करता है। इससे आपको पूरे दिन एनर्जेटिक रखेगा। ऊर्जा के साथ आपके पेट को भी ठंडा रखता है। साथ ही इसके अच्छे बैक्टीरिया पाचन को भी स्वस्थ रखते है। क्योंकि अगर पाचन स्वस्थ है, तो दिमाग भी स्वस्थ है।

क्या है ये देसी ड्रिंक? कैसे बनता है...

हम जिस खास ड्रिंक की बात कर रहे हैं वो है सत्तू, जी हां, वही सत्तू जो हमने बचपन में खूब पिया है और आज ये फिटनेस इंफ्लुएंसर्स का भी फेवरेट बन गया है। भारत में पिया जाने वाला एक खास समर ड्रिंक है जो गर्मी की समस्याओं के लिए रामबाण से कम नहीं। ये अपने प्राकृतिक सुपर सामग्री और नेचुरल प्रोटीन पाउडर के लिए सभी लोगो के पसंदीदा कूलिंग ड्रिंक में से एक माना जाता है। इसे तैयार करने के लिए भुना चना, बाजरा, गेहूं, जौ समेत पौष्टिक अनाज के सूखे मिश्रण को एक साथ मिलाया जाता है। स्वाद में ये अखरोट जैसा मीठा और चने जैसा होता है।

सत्तू पीने और और खाने के अलग अलग तरीके

सत्तू को बनाने के कई तरीके हैं। कुछ लोग इसे ठंडे पानी में चीनी मिलाकर पीते हैं। तो कहीं-कहीं इसमें दूध और शहद मिलाकर पीते है।

बिहार और झारखण्ड जैसे शहरों में इसे मुख्य नाश्ते के रूप में मन जाता है। जहां पर लोग सत्तू में चीनी के जगह बारीक़ प्याज़ और नमक बनाकर इसे पीते हैं। इसके अलावा बिहार के लोग इसे लिट्टी बनाने में, सत्तू के पराठे (मकुनी), सत्तू की कचौरी और सत्तू के लड्डू के रूप में भी खाते है। बिहार में पैदा होने से ये वहां के लोगों के लिए बहुत खास जगह रखता है।

नाम अलग काम वही

सत्तू को पूरी दुनिया में खासकर एशिया में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे भारत के पश्चिम बंगाल और ओडिशा में इसे चतु कहा जाता है। उत्तर भारत में इसे सत्तू बोला जाता है जो लस्सी और उपवास के खाने में प्रयोग होता है। लद्दाख में इसे न्गाम्न्गाम्फे कहा जाता है। भारत के बाहर तिब्बत और नेपाल इसम्पा नाम से ये प्रसिद्ध हैं। और पूर्व एशियाई देश जैसे दक्षिण कोरिया में इसे मिसिगरु के नाम से बोला जाता है। जापान में इनको के नाम से जाना जाता है। जिसमें मुख्य रूप से सोयाबीन का इस्तेमाल होता है।

कंटेंट- एकता शर्मा


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